नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण फॉर्म (Form-6) को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 48 घंटों में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, चुनाव आयोग का पलटवार और कांग्रेस का सड़क पर प्रदर्शन इस मुद्दे को और गरमा रहा है। जानिए इस पूरे विवाद का सार।
विवाद तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-6 में एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ दिया। इसमें आवेदकों को अपने या पूर्वजों के पुराने मतदाता रिकॉर्ड खोजने की शर्त रखी गई थी। पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए यह रिकॉर्ड जुटाना मुश्किल हो गया, जिससे देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
विरोध को बढ़ता देख, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में 26 सितंबर को आयोग ने एक अहम फैसला लिया। जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां से इस विवादास्पद अतिरिक्त फॉर्म को हटा दिया गया और पुराने, सरल फॉर्म-6 को बहाल कर दिया गया।
5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसने फॉर्म-6 में किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी। यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि चुनाव आयोग इसे बिहार SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देकर जायज ठहरा रहा था। कोर्ट ने अब आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।
आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है। आयोग का कहना है कि उसने कानूनी फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत एक घोषणापत्र जोड़ा था। आयोग का दावा है कि यह कदम अदालत के पिछले निर्णयों के अनुरूप था।
सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के बीच इस समय कानूनी व्याख्या का अंतर है। जहां आयोग का मानना है कि उसने अदालत के आदेश का पालन किया, वहीं सुप्रीम कोर्ट का रुख यह है कि उसने इस तरह के किसी संशोधित स्वरूप को कभी हरी झंडी नहीं दी थी। अब इसका फैसला कोर्ट की अगली सुनवाई में ही हो पाएगा।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग एकतरफा फैसले ले रहा है। फिलहाल, जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां के युवाओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन यह मामला अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संवैधानिक सीमाओं पर एक बड़ी बहस बन चुका है।
आगामी सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि क्या चुनाव आयोग का यह कदम कानूनी दायरे के भीतर था, या इसे बदलने की जरूरत है।
Modified Form 6 not approved by us : CJI observes on modified form for enrolling new voters
— ANI Digital (@ani_digital) October 5, 2026
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