CEC ज्ञानेश कुमार पर मंडराया संकट: पूर्व नौकरशाहों ने जारी किया पीपुल्स इंपीचमेंट नोटिस , इस्तीफे की मांग
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चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। देश के पूर्व नौकरशाहों, दिग्गजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पीपुल्स इंपीचमेंट नोटिस (जन महाभियोग नोटिस) जारी किया है। चार पन्नों के इस नोटिस में उन पर संवैधानिक जिम्मेदारियों के उल्लंघन और चुनावी प्रक्रिया में धांधली के 6 बड़े आरोप लगाए गए हैं।

दिग्गज हस्तियों का मोर्चा

इस प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई, पूर्व राजदूत अशोक शर्मा और पूर्व आईबी विशेष निदेशक यशोवर्धन आज़ाद जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनके अलावा योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज जैसे कार्यकर्ता भी इस मुहिम का हिस्सा हैं। इनका साफ कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।

ज्ञानेश कुमार पर लगे 6 बड़े आरोप

नोटिस में आयोग पर लगाए गए प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:

  1. चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करना।
  2. वैधानिक Form 6 में कथित रूप से अनधिकृत बदलाव करना।
  3. ECINET के जरिए मतदाता सूची के कामकाज का केंद्रीकरण करना।
  4. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के हकों को प्रभावित करना।
  5. राजनीतिक निष्पक्षता से समझौता करना।
  6. अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन करना।

Form 6 और SIR पर विवाद

नोटिस में Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटने के बाद दोबारा जुड़ने वालों को नए आवेदक जैसा व्यवहार करने पर मजबूर किया गया। यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है, जहाँ अदालत ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म में बदलाव को सरकार या चुनाव आयोग की मंजूरी नहीं दी गई थी।

वहीं, SIR (Special Intensive Revision) को लेकर कहा गया है कि बिना उचित प्रशिक्षण और तैयारी के इसे लागू किया गया, जिसका खामियाजा गरीबों, महिलाओं, प्रवासियों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ा।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल

पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई ने नागरिकता साबित करने के बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एक नागरिक को बार-बार अपनी पात्रता साबित करने के लिए मजबूर करना लोकतंत्र के लिए घातक है। वहीं, योगेंद्र यादव ने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक कदाचार करार दिया है।

मुख्यालय के बाहर बैरिकेडिंग

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी बात रखने के लिए चुनाव आयोग मुख्यालय पहुँचे, तो रास्तों को बैरिकेड्स से बंद कर दिया गया था। नजीब जंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित करना संविधान के साथ खिलवाड़ है, इसलिए ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

नोट: यद्यपि यह नोटिस एक बड़े वर्ग की चिंता को दर्शाता है, लेकिन यह कोई कानूनी महाभियोग नहीं है। ये आरोप अभी तक किसी अदालत द्वारा सिद्ध नहीं किए गए हैं।

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