जेल से इमरान का अटैक , इस्लामाबाद की ओर बढ़ते लॉन्ग मार्च से डगमगाई शहबाज सरकार
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पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर शुरू हुआ लॉन्ग मार्च अब शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के हजारों समर्थक खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में इस्लामाबाद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

इस्लामाबाद में किलेबंदी प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इस्लामाबाद के प्रमुख रास्तों को रेत से भरे स्टील के कंटेनरों से ब्लॉक कर दिया गया है। शहर के कई इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

शहबाज सरकार की हाईलेवल मीटिंग बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को एक आपातकालीन हाईलेवल मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा स्थिति और PTI के मार्च से पैदा हुए तनाव पर मंथन होगा। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस दौरान सख्त कदम उठाने पर विचार कर सकती है।

गवर्नर रूल की तैयारी? बैठक में केंद्र सरकार संवैधानिक विकल्पों को भी खंगाल रही है। चर्चा है कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल (राष्ट्रपति शासन) लगाने का विकल्प भी मेज पर है। यदि ऐसा होता है, तो केंद्र और PTI के बीच टकराव का स्तर और खतरनाक हो सकता है।

बंदूक नहीं, जनशक्ति का है दम मार्च का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने लक्की मरवत में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पास बंदूकें नहीं, बल्कि जनता की ताकत है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए प्रांत में किसी भी तरह के सैन्य ऑपरेशन या ड्रोन हमलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है।

इमरान की रिहाई ही मुख्य मुद्दा PTI का स्पष्ट कहना है कि इमरान खान को राजनीतिक बदले की भावना से जेल में रखा गया है। 2023 में भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल गए इमरान और उनकी पार्टी के लिए यह मार्च अपनी साख और सत्ता के खिलाफ सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन है।

अब सबकी नजरें सोमवार की बैठक पर टिकी हैं। क्या शहबाज सरकार बातचीत का रास्ता चुनेगी, या देश में एक और बड़ा संवैधानिक संकट पैदा होने वाला है, यह आने वाले कुछ घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।

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