महाराष्ट्र इस समय 1972 के बाद के सबसे भयावह सूखे का सामना कर रहा है। मानसून की बेरुखी ने राज्य की रीढ़ तोड़ दी है। आलम यह है कि राज्य के 358 में से 265 तालुके (74% हिस्सा) सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं।
जलाशय खाली, जीवन पर संकट राज्य के जलाशयों में महज 12 फीसदी पानी शेष बचा है। तालाब और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि बारिश के सीजन में भी लोगों को पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। खंडाला जैसे गांवों में जमीनें फट चुकी हैं और टमाटर व फूलगोभी जैसी फसलें बिना पानी के खेतों में ही दम तोड़ रही हैं।
मराठवाड़ा में बदहाल स्थिति सूखे की मार सबसे अधिक मराठवाड़ा क्षेत्र पर पड़ी है। जालना, बीड और लातूर जैसे जिलों में किसान भुखमरी और कर्ज के बोझ तले आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हैं। लातूर में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि किसान अपने मवेशियों को बचाने के लिए खड़ी गन्ने की फसल को काटकर चारा बनाने के लिए मजबूर हैं।
80 फीसदी खरीफ फसल नष्ट जून से सितंबर के बीच हुई 18.8% बारिश की भारी कमी ने सोयाबीन, कपास और अरहर जैसी मुख्य फसलों को तबाह कर दिया है। राज्य में कुल मिलाकर 18% कम बारिश दर्ज की गई है। लंबे समय तक चले ड्राई स्पेल और एल नीनो के प्रभाव ने खेती के पारंपरिक चक्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
संकट में अंगूर हब की चमक सूखे की चपेट में महाराष्ट्र का प्रसिद्ध अंगूर हब भी आ गया है। द्राक्षों की पंढरी के नाम से मशहूर जालना का कडवंची गांव बर्बादी की कगार पर है। यहां की 1400 एकड़ में फैली अंगूर की बागें सिंचाई के अभाव में सूख रही हैं। जिन किसानों ने लाखों का निवेश किया था, वे अब पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
जिम्मेदार कौन? विशेषज्ञ इस विनाशकारी सूखे के पीछे मानसून में अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के असामान्य मौसम पैटर्न को मुख्य कारण मान रहे हैं। कई इलाकों में 40 से 60 दिनों तक बारिश न होने के कारण जलस्तर रसातल में चला गया है। अब सरकार और प्रशासन सूखे से निपटने के लिए टैंकरों और राहत कार्यों पर निर्भर है, लेकिन स्थिति सामान्य होने के आसार फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।
STORY | Drought, fodder crisis push Latur farmers to harvest sugarcane for cattle feed
— Press Trust of India (@PTI_News) October 3, 2026
Forced to choose between profits from their produce and the immediate survival of their livestock, distressed farmers in drought-hit Latur district of Maharashtra are taking sickles to their… pic.twitter.com/fSs8XG1cog
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