ट्रेन की सबसे मनहूस सीट: जहां सफर कम और मानसिक प्रताड़ना ज्यादा मिलती है
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ट्रेन का सफर आरामदायक हो, ऐसी हर यात्री की चाहत होती है। लेकिन अगर आपको एसी कोच में गेट के ठीक बगल वाली सीट मिल जाए, तो समझ लीजिए कि आपका चैन-सुकून खतरे में है। टिकट बुक करते वक्त एसी का सुखद अहसास यात्रियों को लुभाता है, लेकिन इस सीट पर बैठते ही असली टॉर्चर शुरू हो जाता है।

नींद की जंग और बार-बार खुलता दरवाजा सोशल मीडिया पर इन दिनों एक 19 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक ने इस सीट के दर्द को बयां किया है। इस सीट की सबसे बड़ी मुसीबत है इसका वॉशरूम और मेन गेट के पास होना। हर दो मिनट में कोई न कोई यात्री दरवाजा खोलकर बाहर निकलता है, जिससे ठंडी हवा के झोंके और बाहर का शोर लगातार व्यक्ति की शांति भंग करते रहते हैं।

प्राइवेसी और आराम का कबाड़ा इस सीट पर लेटने का मतलब है अपनी नींद का जनाजा खुद अपनी आंखों से देखना। दरवाजे के बार-बार खुलने-बंद होने की घर्र-घर्र आवाज और यात्रियों की आवाजाही आपको गहरी नींद में जाने ही नहीं देती। स्लीपर हो या एसी, इस जगह पर प्राइवेसी नाम की कोई चीज नहीं होती। रेलवे का जो सफर कभी सुहाना हुआ करता था, वह इस सीट पर पहुंचते ही एक बुरे सपने में बदल जाता है।

क्या रेलवे को डिजाइन बदलने की जरूरत है? जब यात्री अपने आरामदायक सफर के लिए भारी पैसे खर्च करते हैं, तब इस तरह का सीट अरेंजमेंट उन्हें खासा परेशान करता है। सोशल मीडिया पर यात्री खुलकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं और रेलवे के सीटिंग डिजाइन पर सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल यात्रियों के लिए यह सीट एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब तक रेलवे इस डिजाइन में कोई तकनीकी बदलाव नहीं करता, तब तक गेट के पास वाली बर्थ मिलने पर यात्रियों को इस सजा को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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