चुनाव में बायकॉट का दांव: राज ठाकरे की मांग पर कांग्रेस ने खींच दी लक्ष्मण रेखा
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महाराष्ट्र की राजनीति में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हलचल तेज है। चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़ी गई इस जंग ने राज्य के प्रमुख नेताओं को एक मंच पर ला खड़ा किया है, लेकिन अब चुनाव बहिष्कार के मुद्दे पर विपक्ष में ही दरार दिख रही है।

राज ठाकरे की हुंकार: चुनाव बहिष्कार ही एकमात्र रास्ता मुंबई में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा।

ठाकरे ने तर्क दिया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी है। उन्होंने कहा, मैं 2017-18 से कह रहा हूं कि वोट इस तरह से कम नहीं हो सकते और न ही भाजपा के वोट इस तरह बढ़ सकते हैं। दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए हमें चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए।

पृथ्वीराज चव्हाण का कड़ा इनकार ठाकरे के इस बयान से कांग्रेस ने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे गलत रणनीति करार दिया है।

चव्हाण ने कहा, मैं चुनाव बहिष्कार के पक्ष में नहीं हूं। लोकतांत्रिक सरकार चुनना हमारा अधिकार है, इसे छोड़ना सही नहीं है। चुनाव में धांधली जरूर हो रही है, वोटों की चोरी की जा रही है, लेकिन बहिष्कार इसका समाधान नहीं है। उन्होंने अपने 2024 के चुनाव का हवाला देते हुए बताया कि कैसे उनके खिलाफ फर्जी वोटर जोड़े गए थे।

ज्ञानेश कुमार के लिए बढ़ रही मुश्किलें: 20 साल पुरानी फाइल खुली विपक्ष का मुख्य निशाना बने ज्ञानेश कुमार अब कानूनी और प्रशासनिक घेरे में भी फंसते दिख रहे हैं। केरल में उनके खिलाफ 20 साल पुराना मामला फिर से खुल गया है।

दरअसल, 2006 में जब ज्ञानेश कुमार केरल में पीडब्ल्यूडी सचिव थे, तब एक मलेशियाई इंजीनियर ने आत्महत्या की थी। आरोप है कि सुसाइड नोट में उनका नाम था। अब केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला मामला सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच गया है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है, जिसमें उनके द्वारा लिए गए पिछले 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है।

एक तरफ विपक्षी एकजुटता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर जोर दे रही है, तो दूसरी तरफ बहिष्कार बनाम भागीदारी की बहस ने गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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