चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बवाल: हिरासत में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, जानिए कौन हैं ये छात्र नेत्री
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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में तनाव बरकरार है। लगातार तीसरे दिन जारी प्रदर्शन के दौरान, रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया, जब वह आंध्र भवन से जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च निकाल रही थीं।

इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर नेहा बोरा का नाम चर्चा में है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं नेहा बोरा और छात्र राजनीति में उनका सफर कैसा रहा है?

थिएटर से छात्र राजनीति का सफर

नेहा बोरा वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं। वह केवल एक छात्र कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक थिएटर आर्टिस्ट भी हैं। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक और जन-जागरूकता के मुद्दों को जनता के बीच ले जाना उनकी पहचान रही है।

सेना की पृष्ठभूमि और पढ़ाई

नेहा का बचपन एक सैन्य परिवार में बीता है। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत रहे, जिसके कारण उन्हें उत्तर प्रदेश, असम और सिलीगुड़ी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में रहने का मौका मिला। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि दिल्ली विश्वविद्यालय और अंबेडकर यूनिवर्सिटी से जुड़ी है।

NEET-NET आंदोलन का चर्चित चेहरा

नेहा बोरा उस समय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने NEET और NET पेपर लीक के खिलाफ मोर्चा खोला। छात्रों के हक के लिए उन्होंने जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इस कड़े संघर्ष ने उन्हें छात्र आंदोलनों का एक जुझारू चेहरा बना दिया।

Gen-Z आंदोलनों की आवाज

उन्हें मौजूदा पीढ़ी (Gen-Z) के छात्र आंदोलनों का प्रमुख चेहरा माना जाता है। सोशल मीडिया की ताकत और जमीनी स्तर पर सड़क पर उतरने की उनकी क्षमता ने उन्हें AISA के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया। आज वह संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में छात्र राजनीति की दशा और दिशा तय कर रही हैं।

क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

आज नेहा बोरा का नाम परीक्षा सुधार, पेपर लीक के खिलाफ लड़ाई और छात्र अधिकारों के लिए मुखर होने के कारण हर तरफ लिया जा रहा है। एक तरफ जहां उनके समर्थक उनके संघर्ष को सलाम कर रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

फिलहाल, छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है और नेहा बोरा की हिरासत ने सरकारी तंत्र और छात्र आंदोलन के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है।

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