फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी पर शुरू हुई चर्चा अब दिल्ली की सियासत में गरमा गई है। बीजेपी ने इस मामले को लेकर गांधी परिवार के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया है।
बीजेपी का तीखा हमला बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल और प्रियंका गांधी से सीधा सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि आखिर गांधी परिवार कैप्टन स्मित की बहादुरी पर एक शब्द बोलने से क्यों कतरा रहा है?
त्रिवेदी ने आगे कहा कि जो लोग अतीत में संदिग्धों और आतंकियों के समर्थन में खड़े नजर आए, वे आज देश के असली नायक पर चुप्पी साधे हुए हैं।
पुराने बयानों की याद सुधांशु त्रिवेदी ने याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोग जाकिर नाइक को शांति का मसीहा और अफजल गुरु को हालात का मारा बता चुके हैं।
उन्होंने बुरहान वानी को भटका हुआ नौजवान और याकूब मेमन की फांसी को न्यायिक हत्या बताने वाले बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि तब तो इनका पूरा कुनबा मुखर था, फिर अब इतनी खामोशी क्यों?
क्या है मामला? हाल ही में एक फ्लाईदुबई फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में हुए हमले के बीच कैप्टन स्मित मछार ने अद्भुत सूझबूझ दिखाई थी। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान में सवार करीब 180 यात्रियों की जान बचाई थी।
बीजेपी का आरोप है कि ऐसे जांबाज के लिए गांधी परिवार के पास न कोई शब्द है और न ही कोई सराहना, जो उनके दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।
कांग्रेस में मतभेद? दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग सुर दिख रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव जयराम रमेश ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की जमकर तारीफ की है।
खरगे ने कहा कि कैप्टन ने एक खतरनाक साजिश को फेल किया और देश को ऐसे बहादुरों की जरूरत है। वहीं, जयराम रमेश ने भी उनकी कार्रवाई को प्रेरणादायक बताया है।
गांधी परिवार की चुप्पी पर सवाल बीजेपी का मुख्य तर्क कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (गांधी परिवार) पर है। बीजेपी का कहना है कि जब पार्टी के अन्य बड़े नेता प्रशंसा कर रहे हैं, तो राहुल-प्रियंका का मौन क्या किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है?
बीजेपी ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का संकेत दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
#WATCH | Delhi | BJP MP Sudhanshu Trivedi says, Today, we want to ask the Congress party directly: Why is there not a single word of praise coming from those who hailed Zakir Naik as a messiah of peace, described Afzal Guru as a victim of circumstance, called Burhan Wani a… pic.twitter.com/Xvp048mwZm
— ANI (@ANI) October 4, 2026
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