JDU में आर-पार की जंग: नीरज-अनंत के झगड़े से ललन सिंह ने झाड़ा पल्ला
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बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे हॉट सीट बन गई है। यहाँ जदयू के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ पार्टी के ही बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। यह लड़ाई अब केवल चुनावी नहीं, बल्कि जदयू के भीतर चल रही आपसी खींचतान का केंद्र बन गई है।

नीरज बनाम अनंत: क्या है टकराव का कारण? जदयू ने नीरज कुमार को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी आशीर्वाद प्राप्त है। वहीं, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। वे न केवल नीरज के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, बल्कि जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनूज कुमार के पक्ष में प्रचार भी कर रहे हैं। इस स्थिति ने जदयू के सामने बड़ी प्रतिष्ठा की चुनौती खड़ी कर दी है।

ललन सिंह का साफ किनारा पार्टी ने इस विवाद को सुलझाने की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को सौंपी थी, जिस पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी मुहर लगाई थी। लेकिन अब ललन सिंह ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। लखीसराय में उन्होंने स्पष्ट कहा, मैं दो लोगों के झगड़े में नहीं पड़ता। उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि दोनों नेता खुद सुलह करना चाहें, तो वह मध्यस्थता कर सकते हैं।

पार्टी की चुप्पी पर खड़े हो रहे सवाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ खुलेआम काम करने वाले अनंत सिंह पर जदयू अब तक चुप क्यों है? सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद केवल नीरज और अनंत तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के शीर्ष स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है। जानकारों का मानना है कि इस विवाद के पीछे पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और शक्ति परीक्षण भी एक बड़ा कारण है।

प्रतिष्ठा का सवाल बनी पटना स्नातक सीट जदयू के मंत्री निशांत कुमार ने जरूर यह दोहराया है कि पार्टी नीरज कुमार के साथ है, लेकिन धरातल पर जिस तरह से एक विधायक पार्टी प्रत्याशी के विरोध में उतर आया है, उसने नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ललन सिंह का दूरी बनाना किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है? या फिर पार्टी शीर्ष नेतृत्व वास्तव में इस अंतर्कलह को रोकने में असमर्थ है?

बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों का चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि जदयू के भीतर की यह अग्निपरीक्षा पार्टी को और मजबूत करेगी या अंदरूनी दरार को और गहरा कर देगी।

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