4 करोड़ की सैलरी, फिर भी खर्च नहीं किया तो नाराज होंगे Nvidia CEO: क्या है जेनसन हुआंग का नया AI फॉर्मूला?
News Image

Nvidia के सीईओ जेनसन हुआंग का एक बयान इन दिनों टेक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें उन्होंने उन इंजीनियरों और एआई रिसर्चरों को निशाने पर लिया है जो एआई टूल्स का पूरा लाभ नहीं उठा रहे हैं।

इंजीनियरों से क्यों नाराज हैं जेनसन हुआंग? हुआंग का मानना है कि जो इंजीनियर सालाना करीब 4 करोड़ रुपये (5 लाख डॉलर) का पैकेज ले रहे हैं, उन्हें एआई टोकन्स पर कम से कम 2 करोड़ रुपये (ढाई लाख डॉलर) खर्च करने चाहिए।

उनका तर्क है कि अगर कोई इंजीनियर साल के अंत में उन्हें यह बताए कि उसने मात्र 5 हजार डॉलर के एआई टोकन्स का उपभोग किया है, तो यह उनकी कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करता है। उनके लिए यह कंपनी की उत्पादकता को कम आंकने जैसा है।

कोडिंग का बदलेगा तरीका जेनसन हुआंग के अनुसार, भविष्य में सॉफ्टवेयर विकास का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब इंजीनियरों को केवल कोड नहीं लिखना होगा, बल्कि उन्हें विचार (Ideas), आर्किटेक्चर और स्पेसिफिकेशंस पर ध्यान देना होगा।

वे कहते हैं, भविष्य में हर इंजीनियर के पास 100 एआई एजेंट्स होंगे, जो उसकी उत्पादकता को कई गुना बढ़ा देंगे। इंजीनियरों का काम अब केवल कोड लिखना नहीं, बल्कि इन एजेंटों को सही दिशा में नियंत्रित करना और अच्छे परिणामों के लिए प्रेरित करना होगा।

क्या सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री खत्म हो रही है? इस सवाल पर हुआंग ने स्पष्ट किया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री खत्म नहीं हो रही, बल्कि उसका स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने कहा कि SQL, फोटोशॉप और अन्य डेटाबेस टूल्स का इस्तेमाल करने वाले एजेंट्स की संख्या 100 गुना बढ़ जाएगी।

इंसानों का मुख्य काम अब इन एजेंटों द्वारा तैयार किए गए फाइनल रिजल्ट्स को समझना और उन्हें कंट्रोल करना होगा। यानी कोडिंग की भाषा तो रहेगी, लेकिन उसे लिखने वाला हाथ इंसानी नहीं, एआई होगा।

चीन के बाजार और अमेरिकी वर्चस्व की लड़ाई अपनी कंपनी के व्यापार पर बात करते हुए हुआंग ने स्वीकार किया कि Nvidia ने चीन में अपना 95 फीसदी मार्केट शेयर खो दिया है। हालांकि, वे अब वहां वापसी की कोशिशों में हैं क्योंकि उन्हें कुछ मंजूरियां मिली हैं।

हुआंग का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों (जैसे सेमीकंडक्टर और एआई) पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। वे चाहते हैं कि दुनिया की 90 फीसदी टेक्नोलॉजी अमेरिकी चिप्स और कंप्यूटिंग सिस्टम पर आधारित हो, चाहे देश अपना एआई खुद ही क्यों न विकसित कर लें।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

WWE Money in the Bank 2026: रोमन रेंस का बड़ा मुकाबला, भारत में फैंस की उड़ेगी नींद; जानें कब और कहाँ देखें लाइव!

Story 1

एशियन गेम्स 2026: भारत का हॉकी में दबदबा, मलेशिया को रौंदकर फिर जीता गोल्ड, LA ओलंपिक का टिकट पक्का

Story 1

क्या फिर चौथी बार दूल्हा बनने वाले हैं शोएब मलिक? सोशल मीडिया की वायरल खबरों का ये है सच

Story 1

अमृतसर में सरेआम हत्या: मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मद संधू को मारी गई गोली

Story 1

एशियन गेम्स 2026: भारत का गोल्डन दबदबा, फाइनल में पाकिस्तान को 19 रनों से दी मात

Story 1

ममता बनर्जी की चोट और डिग्री पर बड़ा विवाद: ऋतब्रत बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप

Story 1

भारत-पाक महामुकाबले में बेबी सेलिब्रेशन का ड्रामा: सैम अय्यूब की हरकत पर भड़के भारतीय बल्लेबाज, ऐसे लिया बदला

Story 1

मुलाकात बहुत सुखद रही... पीएम मोदी और हरियाणा बीजेपी विधायकों की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

Story 1

दिल्ली का कूड़े का पहाड़ अब इतिहास बनेगा: 2026 तक ओखला लैंडफिल को मिलेगी नई पहचान

Story 1

अमृतसर में सरेआम हत्या: LGBTQ इन्फ्लुएंसर मैड संधू को गोलियों से भूना, सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप