यह 100% सरकारी फेलियर है : बाल मौत मामले पर बालाघाट में गरजे राहुल गांधी
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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौतों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इसी क्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट के जगला गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।

सिस्टम पूरी तरह विफल पीड़ित परिजनों से बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की व्यवस्था को 100% सरकारी फेलियर करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वे जहां भी जाते हैं, उन्हें सरकारी तंत्र की नाकामी ही नजर आती है। राहुल ने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को संसद के पटल पर जोरदार तरीके से उठाएंगे।

कुपोषण और बदहाली पर सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सरकार का रवैया उदासीन है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे सरकार ने इन आदिवासी परिवारों को पूरी तरह से उनके हाल पर छोड़ दिया है।

बता दें कि सरकारी रिकॉर्ड में मौतों का आंकड़ा 32 बताया गया है, जबकि कांग्रेस इससे कहीं अधिक मौतों का दावा कर रही है।

अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग राहुल ने केवल स्वास्थ्य तक सीमित न रहकर आदिवासी अधिकारों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनकी ज़मीन, मनरेगा और वन अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले पट्टे का हक मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रभावित इलाकों में तत्काल प्रभाव से अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं।

योजनाओं के लाभ में कटौती बर्दाश्त नहीं विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकारें विकास की बात तो करती हैं, लेकिन जरूरत के वक्त गायब हो जाती हैं। उन्होंने योजनाओं के घालमेल पर भी आपत्ति जताई। राहुल ने कहा कि यदि कोई परिवार दो अलग-अलग योजनाओं के लिए पात्र है, तो उन्हें दोनों का लाभ मिलना चाहिए; एक का पैसा दूसरी योजना के नाम पर काटा नहीं जाना चाहिए।

पहला मालिक आदिवासी राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस उन्हें वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी मानती है और वे इस देश के पहले मालिक हैं। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी इन पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाती है।

गौरतलब है कि बालाघाट में बच्चों की मौत का यह मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है, जिसने राज्य सरकार से इस पर जवाब तलब किया है।

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