डोंगरगढ़ में फिर आ धमका तेंदुआ: ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ी, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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डोंगरगढ़: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र डोंगरगढ़ में एक बार फिर तेंदुए की धमक ने स्थानीय निवासियों के होश उड़ा दिए हैं। घोटिया रोड के पास तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। बार-बार वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों के करीब आने से वन विभाग की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

फार्म हाउस के पास दिखा तेंदुआ ताजा मामला डोंगरगढ़ से करीब 14 किलोमीटर दूर ग्राम ढारा का है। रात करीब 10 बजे ग्रामीणों ने धवल चावड़ा के फार्म हाउस के समीप तेंदुए को टहलते हुए देखा। अचानक सामने आए जंगली जानवर को देखकर वहां मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि तेंदुआ और ग्रामीणों का आमना-सामना नहीं हुआ, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

निगरानी व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब तेंदुआ रिहायशी इलाकों के करीब देखा गया है। क्षेत्र में आए दिन तेंदुए की मौजूदगी की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से धरातल पर कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते। ग्रामीणों ने तीखे सवाल किए हैं कि क्या प्रभावित इलाकों में नियमित गश्त की जा रही है या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा बनी चुनौती तेंदुए के खौफ ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। रात के समय खेतों और फार्म हाउस की ओर जाना तो दूर, लोग अब अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल प्रभाव से मौके का निरीक्षण करने और गश्त बढ़ाने की मांग की है।

कैमरा ट्रैप और अलर्ट सिस्टम पर चुप्पी ग्रामीण अब यह जानने के इच्छुक हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में क्या कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं? वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी के लिए विभाग के पास क्या ठोस तकनीक है? लोगों का आरोप है कि किसी भी संभावित खतरे की जानकारी समय रहते स्थानीय लोगों को नहीं दी जाती, जिससे सतर्कता बरतना मुश्किल हो जाता है।

हादसे से पहले ठोस कार्रवाई की मांग ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है: विभाग को लकीर पीटने के बजाय सक्रियता दिखानी होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बड़ी अनहोनी या जान-माल के नुकसान के बाद की गई कार्यवाही का कोई अर्थ नहीं है। फिलहाल, दहशत के साये में जी रहे ग्रामीण वन विभाग की अगली कार्रवाई और तेंदुए को सुरक्षित जंगल में खदेड़ने के ठोस प्रयासों का इंतजार कर रहे हैं।

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