यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: अखिलेश यादव का बड़ा दांव, क्या बीजेपी सरकार में मची है भगदड़ ?
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उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से सपा के पास दो सीटें जीतने का गणित है, लेकिन उन्होंने तीसरे प्रत्याशी को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। मैदान में 11 उम्मीदवारों के होने से अब क्रॉस वोटिंग तय मानी जा रही है।

अखिलेश का दावा और बीजेपी में बेचैनी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुले तौर पर दावा किया है कि सत्तारूढ़ दल के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी को भी बिना उचित समायोजन के खाली वादा नहीं करना चाहते। अखिलेश का इशारा साफ है—वे 2024 की अपनी उस हार का बदला लेने की तैयारी में हैं, जहां क्रॉस वोटिंग के कारण उनके उम्मीदवार आलोक रंजन हार गए थे।

मंत्री राकेश सचान की मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंस इस सियासी हलचल के बीच योगी सरकार के मंत्री राकेश सचान का सपा कार्यालय पहुंचना और अखिलेश यादव से मुलाकात करना चर्चा का केंद्र बन गया है। सचान की मौजूदगी उस समय ज्यादा गौर करने वाली रही, जब सपा अपना नामांकन दाखिल कर रही थी।

हालांकि, राकेश सचान ने इसे महज एक कॉफी मीटिंग बताया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के चैंबर में वे मौजूद थे, जहां संयोग से अखिलेश यादव भी आ गए। लेकिन सियासी गलियारों में इसे कैबिनेट से विभाग छिनने की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या पुराने समाजवादी घर वापसी की राह पर हैं? राकेश सचान का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे पुराने समाजवादी रहे हैं और सपा के टिकट पर सांसद भी रह चुके हैं। फिलहाल, उनके पास जो विभाग (MSME) थे, उनमें बदलाव के बाद से ही उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हैं।

सपा का पलटवार: बीजेपी के लोग निराश हैं सपा विधायक शाहिद मंजूर ने इस पूरी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के अंदर भारी निराशा है। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों ने उम्मीद की थी कि सरकार आने पर तरक्की होगी, वे अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सपा नेताओं का मानना है कि 2024 में जिन विधायकों ने सपा छोड़कर बीजेपी का साथ दिया था, वे अब अपनी गलती सुधारने के मूड में हैं।

लोकतंत्र बनाम बेईमानी अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि वे लोकतंत्र में किसी भी प्रकार की बेईमानी के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि यदि पिछली बार बीजेपी ने खेल न किया होता, तो आज उनके पास और अधिक राज्यसभा सांसद होते। अब देखना यह है कि क्या 2026 के इस चुनाव में अखिलेश अपनी बिसात बिछा पाएंगे, या बीजेपी फिर से अपनी सत्ता के दम पर इस शक्ति प्रदर्शन में बाजी मार ले जाएगी।

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