फ्लाईदुबई कॉकपिट हिंसा: चाकू-कुल्हाड़ी के बीच आखिर सुरक्षित कौन?
News Image

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में जो हुआ, उसने विमानन सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। 174 यात्रियों को ले जा रहे इस बोइंग 737 मैक्स विमान के कॉकपिट में अचानक पायलटों के बीच खूनी संघर्ष छिड़ गया। विमान 15,000 फीट नीचे गिर गया, लेकिन यात्रियों और ऑफ-ड्यूटी पायलटों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा जांच के बावजूद कॉकपिट में हथियार कहां से आए?

क्या बाहर से हथियार लाना मुमकिन है?

हैरानी की बात यह है कि कॉकपिट में किसी भी हथियार को बाहर से लाने की जरूरत ही नहीं होती। लगभग हर कमर्शियल विमान में एक क्रैश एक्स (आपातकालीन कुल्हाड़ी) अनिवार्य रूप से रखी जाती है। यह दशकों से विमान का हिस्सा है, ताकि इमरजेंसी में पायलट हार्डवेयर, पैनल या शीशे तोड़ सकें। जांच में साफ हुआ है कि फ्लाईदुबई की घटना में इस्तेमाल हुई कुल्हाड़ी विमान के भीतर ही मौजूद सुरक्षा उपकरण था, न कि कोई बाहरी हथियार।

फूड ट्रे में छिपा खतरा

विमान के भीतर खतरनाक वस्तुओं का एक और जरिया पायलटों का भोजन है। एयरलाइंस के नियमों के तहत, पायलटों की फूड ट्रे में अक्सर स्टील के चाकू और कांटे शामिल होते हैं। एयरपोर्ट पर चाहे कितनी भी कड़ी सुरक्षा हो, फ्लाइट डेक के अंदर ऐसे साधन पहले से मौजूद होते हैं जिनका गलत इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है।

जान बचाने वाली कुल्हाड़ी, जिसे हथियार बनाया गया

विमान में कुल्हाड़ी का मुख्य उद्देश्य आग से निपटना है। अक्सर लिथियम बैटरी के कारण विमान के पैनल या छत के अंदर छिपी आग लग जाती है, जिसे बुझाने के लिए क्रू को पैनल तोड़कर आग के स्रोत तक पहुंचना पड़ता है। 2013 में आसियाना एयरलाइंस के हादसे के दौरान भी इसी कुल्हाड़ी ने कई क्रू मेंबर्स की जान बचाई थी। यह एक जीवन रक्षक उपकरण है, जिसे हटाना सुरक्षा के नजरिए से खुद एक बड़ा जोखिम है।

अंदरूनी खतरा : बुलेटप्रूफ दरवाजे भी बेअसर

विमानन जगत की कड़वी सच्चाई यह है कि सबसे बड़ा खतरा बाहर नहीं, बल्कि कॉकपिट के अंदर है। जिसे इनसाइडर थ्रेट कहा जाता है। जब कोई पायलट या कर्मचारी मानसिक बीमारी या गलत इरादे के साथ कॉकपिट में होता है, तो सुरक्षा के सभी प्रोटोकॉल धरे रह जाते हैं। 2015 के जर्मनविंग्स हादसे का उदाहरण हमारे सामने है, जहां ऐसी ही स्थिति में विमान पहाड़ियों से टकरा दिया गया था।

इमरजेंसी कोड और सुरक्षा खामियां

कॉकपिट में आने का एक आपातकालीन कोड होता है, लेकिन यह तब के लिए है जब दोनों पायलट बेहोश हो जाएं। अगर अंदर बैठा पायलट होश में है, तो वह एक स्विच दबाकर किसी के भी कॉकपिट में आने के अनुरोध को रद्द कर सकता है। यानी अगर अंदर मौजूद पायलट खुद ही हमलावर बन जाए, तो बाहर से उसे रोकना लगभग नामुमकिन है।

समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन खतरों को पूरी तरह खत्म करना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, पायलटों की निरंतर मेडिकल जांच और उनके मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी ही एकमात्र उपाय है। विमानन कंपनियां मानती हैं कि कॉकपिट में हर समय दो-व्यक्ति नियम (Two-Person Rule) लागू करना या उपकरणों को हटाना सुरक्षा के अन्य पहलुओं को कमजोर कर सकता है। फिर भी, फ्लाईदुबई जैसी घटनाएं यह चेतावनी दे रही हैं कि इंसान की फितरत और अचानक बदलते व्यवहार का अनुमान लगाना कभी-कभी तकनीकी सुरक्षा से भी ज्यादा मुश्किल होता है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

एशियन गेम्स फाइनल: श्रीलंका को रौंदकर भारत फाइनल में, गोल्ड मेडल के लिए पाकिस्तान से होगी महाजंग

Story 1

नीतीश कुमार को गद्दार बुलाने पर गरमाई राजनीति, ललन सिंह का सोनिया गांधी पर पलटवार

Story 1

हिटमैन का विश्व रिकॉर्ड: भारत में वनडे में 200 छक्के जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने रोहित शर्मा

Story 1

आईएएस से राजनीति में दिव्या मित्तल की एंट्री: राजा भैया की पार्टी के पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

Story 1

मेरी मौत की जिम्मेदार सिर्फ पत्नी होगी... शादी के 7 महीने बाद डिलीवरी ब्वॉय ने फंदे को लगाया गले

Story 1

हवा में हाईजैक का खतरा: क्या है 7500 कोड और कैसे काम करता है सुरक्षा चक्र?

Story 1

15 साल के वैभव सूर्यवंशी का जापान में जलवा, एशियन गेम्स सेमीफाइनल में श्रीलंका के गेंदबाजों की जमकर धुनाई

Story 1

आसमान में हवा-हवाई साज़िश: कॉकपिट में घुसे आतंकी को यात्री ने दबोचा, टला बड़ा हादसा

Story 1

मौत के मुंह से फ्लाइट वापस लाया भारतीय पायलट: बेहोश होने से पहले किया वह चमत्कार जो नेतन्याहू को भी लगा नामुमकिन

Story 1

अनंत सिंह का रसगुल्ला पॉलिटिक्स : अनुज सिंह के नामांकन में होगी 30 हजार रसगुल्लों की बौछार