हवा में हाईजैक का खतरा: क्या है 7500 कोड और कैसे काम करता है सुरक्षा चक्र?
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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारतीय मूल के पायलट स्मित मच्छार पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला कर दिया। घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने न केवल विमान को संभाला, बल्कि साहस दिखाते हुए इमरजेंसी अलर्ट भेजकर उसे सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा।

इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हवा में सुरक्षा प्रोटोकॉल कैसे काम करते हैं और पायलट व ग्राउंड टीम के बीच तालमेल कैसे होता है?

7500 कोड: पायलट का खामोश संदेश

दुनियाभर के विमानों में ट्रांसपोंडर लगा होता है, जो विमान की सटीक लोकेशन और स्थिति की जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को देता है। अंतरराष्ट्रीय नियमों (ICAO) के अनुसार, यदि कॉकपिट में कोई आपात स्थिति हो या विमान हाईजैक हो जाए, तो पायलट अपने ट्रांसपोंडर में 7500 कोड सेट कर देता है।

यह कोड एक यूनिवर्सल सिग्नल है। जैसे ही यह ATC के रडार पर फ्लैश होता है, तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि फ्लाइट खतरे में है। इस कोड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पायलट को रेडियो पर कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे हाईजैकर्स को इसकी भनक भी नहीं लगती।

अलर्ट मिलते ही शुरू होता है ग्राउंड एक्शन

जैसे ही 7500 कोड का सिग्नल ATC को मिलता है, युद्धस्तर पर सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। संबंधित देश की सरकार, सेना, और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ जाती हैं।

  1. फाइटर जेट्स की तैनाती: वायुसेना के लड़ाकू विमान तुरंत उड़ान भरते हैं और उस संदिग्ध फ्लाइट को हवा में घेर लेते हैं। इसे एस्कॉर्ट करना कहते हैं, ताकि विमान अपनी दिशा से न भटके।
  2. एयरस्पेस क्लियरेंस: उस फ्लाइट के आसपास उड़ रहे अन्य सभी विमानों को सुरक्षित दूरी बनाने का निर्देश दिया जाता है।
  3. डायवर्जन और सुरक्षा: विमान को सबसे नजदीकी सुरक्षित एयरपोर्ट की तरफ मोड़ा जाता है। वहां रनवे पर पहले से ही कमांडो, मेडिकल टीमें, और बम निरोधक दस्ते तैनात कर दिए जाते हैं ताकि लैंडिंग के तुरंत बाद विमान को कब्जे में लिया जा सके।

फ्लाईदुबई मामले में क्या हुआ था?

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि फ्लाईदुबई की इस फ्लाइट में कोई आतंकी साजिश नहीं थी। को-पायलट और कैप्टन के बीच हुए निजी विवाद के कारण गुस्से में गलती से इमरजेंसी कोड एक्टिवेट हो गया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इसे हाईजैक मानकर ही पूरी कार्रवाई की।

यह घटना साबित करती है कि आसमान में सुरक्षा के कड़े नियम और पायलटों की सूझबूझ किसी भी बड़े हादसे को टालने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्मित मच्छार की बहादुरी ने एक बार फिर यह दिखाया कि विषम परिस्थितियों में संयम ही सुरक्षा की पहली कुंजी है।

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