नई दिल्ली: दिल्ली में बुधवार को हुई इंडिया गठबंधन की हाई-प्रोफाइल बैठक भले ही चुनाव आयोग के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन बैठक के बाहर का एक सवाल गठबंधन की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर गया। नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर विपक्ष का पुराना अंतर्विरोध एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है।
ममता का टालू रवैया बैठक के बाद जब पत्रकारों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तीखा सवाल किया कि क्या 2029 में राहुल गांधी विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, तो ममता ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पहले उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा, आप होंगे कैंडिडेट, और फिर खामोशी साधते हुए केवल इतना कहा कि कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर बात करेंगे।
नेतृत्व पर फंसा पेंच यह चुप्पी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विपक्ष अभी भी एक नाम पर सहमत नहीं है। जहां कांग्रेस राहुल गांधी को स्वाभाविक नेता मानती है, वहीं टीएमसी, आप और सपा जैसे दल किसी एक चेहरे को आगे करने से बच रहे हैं। क्षेत्रीय क्षत्रपों का मानना है कि राज्य स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ ही बीजेपी को हराने का एकमात्र फॉर्मूला है, न कि किसी एक नेता को प्रोजेक्ट करना।
बीजेपी का जोरदार हमला इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसने में देर नहीं की। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब गठबंधन के सहयोगी ही राहुल गांधी के नाम पर मुहर लगाने से हिचकिचा रहे हैं, तो आम जनता उन पर भरोसा कैसे करेगी? बीजेपी ने इस गठबंधन को नीति और नेताविहीन बताकर विपक्ष की कमजोरी को उजागर किया है।
क्या 2029 की राह में रोड़ा बनेगी राजनीति? हालांकि गठबंधन ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करने का साझा फैसला लिया है, लेकिन असल चुनौती प्रधानमंत्री पद की दावेदारी बनी हुई है। क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस के वर्चस्व को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। ममता बनर्जी का यह टालमटोल भरा रवैया साबित करता है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक को अपनी अंदरूनी राजनीति के बड़े भंवर से पार पाना होगा।
#WATCH | Delhi | When asked if Rahul Gandhi will be the PM candidate in 2029, Former West Bengal CM Mamata Banerjee chooses to remain silent. She only says, We will hold a press conference tomorrow. pic.twitter.com/YuLZwvKfNk
— ANI (@ANI) September 30, 2026
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