दिल्ली में INDIA ब्लॉक की हुंकार: चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट पर घेराबंदी की तैयारी
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दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बुधवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की एक बेहद अहम बैठक शुरू हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया है, जिसे लेकर विपक्ष ने सरकार और आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

दिग्गज नेताओं का जमावड़ा बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और राजद नेता तेजस्वी यादव जैसे बड़े चेहरे शामिल हुए। कुछ दल वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि चुनाव सुधारों के मुद्दे पर पूरा विपक्ष लामबंद है।

वोटर लिस्ट पर विपक्ष को गहरा संदेह विपक्ष का सबसे गंभीर आरोप SIR प्रक्रिया को लेकर है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि बिना उचित जांच और सुनवाई के नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है। विपक्ष अब इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

चुनाव आयोग निशाने पर बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर भी तीखी चर्चा हुई। कांग्रेस अपनी कार्यसमिति की बैठक में पहले ही उनके इस्तीफे की मांग कर चुकी है। अब INDIA ब्लॉक इस मांग को एक संयुक्त राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विपक्ष का मानना है कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित करने के लिए आगे आना चाहिए।

सड़क से संसद तक आंदोलन की रणनीति बैठक में सिर्फ चर्चा ही नहीं, बल्कि एक्शन प्लान पर भी जोर दिया जा रहा है। विपक्षी दल संसद के आगामी सत्र में सरकार को घेरने के साथ-साथ देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। संयुक्त जनसभाएं और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े अभियान भी एजेंडे का हिस्सा हैं। साझा रणनीति बनाने के लिए एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आयोग के पास भेजने पर भी विचार किया जा रहा है।

चुनौतियां और चुनावी विश्वसनीयता हालांकि समाजवादी पार्टी समेत कुछ दलों की अनुपस्थिति और विभिन्न राज्यों की अलग-अलग प्राथमिकताएं विपक्ष के लिए चुनौती हैं, लेकिन मतदाता सूची के मुद्दे पर अधिकांश दल एक सुर में बोल रहे हैं। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि चुनावी बुनियाद यानी वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी देश के लोकतंत्र की विश्वसनीयता को खतरे में डाल सकती है।

अब सबकी निगाहें बैठक के बाद आने वाले संयुक्त बयान पर टिकी हैं। क्या विपक्ष केवल बयानों तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के खिलाफ कोई बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करेगा? इसका जवाब जल्द ही सामने आएगा।

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