CEC कठपुतली, रक्षक ही बन गए भक्षक : मल्लिकार्जुन खरगे का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
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कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली करार देते हुए उन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

वोटबंदी का लगाया आरोप खरगे ने आरोप लगाया कि देश में सुनियोजित साजिश के तहत मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने इसे वोटों की नोटबंदी यानी वोटबंदी करार दिया। उन्होंने कहा कि जो संवैधानिक संस्था वोट की रक्षा करने के लिए बनाई गई थी, वही आज रक्षक से भक्षक की भूमिका में नजर आ रही है।

युवाओं के मताधिकार पर संकट कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार युवाओं से उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को अवैध बताते हुए उन्होंने तंज कसा कि सरकार ने नौकरियां तो दी नहीं, अब युवाओं को वोट डालने का हक भी देना नहीं चाहती। उन्होंने याद दिलाया कि 1988 में राजीव गांधी सरकार ने ही युवाओं को सशक्त बनाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 से घटाकर 18 की थी।

चुनाव आयोग के सामने रखीं 5 मांगें खरगे ने आगामी विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग से 5 प्रमुख मांगें की हैं:

  1. मतदाता सूची में हुए हर बड़े बदलाव का डेटा सार्वजनिक किया जाए।
  2. जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें सूचित कर अपील करने का मौका मिले।
  3. राजनीतिक दलों को मतदाता सूची का डेटा सरल फॉर्मेट में समय पर मिले।
  4. वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायतों की समयबद्ध और स्वतंत्र जांच हो।
  5. पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

राहुल गांधी के मुद्दों को सराहा खरगे ने हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में डुप्लीकेट वोटरों को लेकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग समय रहते इन शिकायतों पर गौर करता, तो आज उसकी विश्वसनीयता कटघरे में नहीं होती।

सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि संविधान बचाने की है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस वोट के अधिकार के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी। वहीं, दूसरी ओर चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरी तरह से कानूनी नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

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