चुनाव आयोग का काम नागरिकता तय करना नहीं , सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के बयान पर मचा सियासी बवाल
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चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुधांशु धूलिया के एक हालिया इंटरव्यू ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नागरिकता को प्रमाणित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व नहीं है।

जयराम रमेश का तीखा हमला कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जस्टिस धूलिया के बयान को आधार बनाते हुए चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ECI का अर्थ भारत का चुनाव आयोग है, न कि भारतीयों की नागरिकता तय करने वाला । रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन कर रहा है।

CEC का इस्तीफा क्यों मांग रही कांग्रेस? जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि CEC केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म 6 में मनमाने बदलाव करके जेन जेड (Gen Z) युवा मतदाताओं को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई है, जो सीधे तौर पर संविधान का अपमान है।

क्या कहता है संविधान और कानून? जस्टिस धूलिया ने याद दिलाया कि नागरिकता से जुड़े मामले नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत आते हैं। इसका निर्धारण करना गृह मंत्रालय का काम है, न कि चुनाव आयोग का। सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने कई फैसलों में यह साफ कर चुका है कि चुनाव आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची के प्रबंधन तक सीमित है, न कि नागरिकों की पात्रता की जांच करने की।

SIR पर क्या बोले जस्टिस धूलिया? SIR (State Identity Register) को लेकर उठ रहे सवालों पर जस्टिस धूलिया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इसे रोकने का आदेश इसलिए नहीं दिया था क्योंकि किसी ने इसे रोकने की औपचारिक मांग नहीं की थी। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि मतदाता का भारतीय नागरिक होना तो अनिवार्य शर्त है, लेकिन इस प्रक्रिया को इतना जटिल नहीं बनाया जाना चाहिए कि आम नागरिक के अधिकार ही प्रभावित हो जाएं।

आगे की राह विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था के बजाय सत्ताधारी दल के एक उपकरण के रूप में काम कर रहा है। जस्टिस धूलिया के बयान ने इस बहस को नई दिशा दे दी है कि क्या चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई पेश करता है।

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