अशोक सिंघल को याद कर भावुक हुए योगी, अखिलेश पर साधा तीखा निशाना; कहा- जालीदार टोपी न छिटक जाए
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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। लखनऊ में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा और अखिलेश यादव पर सीधा और करारा प्रहार किया। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के संघर्षों को याद करते हुए विपक्षी दलों की घेराबंदी तेज कर दी।

राम मंदिर आंदोलन और अशोक सिंघल का योगदान

सीएम योगी ने अशोक सिंघल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1980 के दशक में उन्होंने सनातन धर्म और राम जन्मभूमि मुक्ति की जो अलख जगाई थी, वह आज एक ज्वाला बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए याद किया कि कैसे 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं, तब अशोक सिंघल चट्टान की तरह उनके साथ खड़े थे।

जालीदार टोपी पर अखिलेश को घेरा

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए योगी ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और प्राण-प्रतिष्ठा में विपक्षी नेता इसलिए नहीं गए क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनकी जालीदार टोपी न छिटक जाए। उन्होंने कहा कि जिन्हें वोट बैंक प्यारा था, उन्होंने प्रभु राम के निमंत्रण को ठुकराना ही बेहतर समझा।

गाय माता है, पशु नहीं

गौ-संरक्षण के मुद्दे पर भी योगी आदित्यनाथ ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की बात करते हैं। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, क्या कोई अपनी मां को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देता है? गाय हमारी माता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-रक्षा उनके लिए राजनीति का नहीं, बल्कि आस्था का बड़ा प्रश्न है।

2027 के चुनाव की नई पटकथा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम योगी का यह बयान मात्र श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव का एजेंडा सेट करने की कोशिश है। अखिलेश यादव अपने PDA फॉर्मूले के जरिए चुनावी समीकरण साध रहे हैं, वहीं बीजेपी 1990 के गोलीकांड और राम मंदिर के मुद्दे को दोबारा चर्चा में लाकर हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की रणनीति पर काम कर रही है।

विचारधारा की लड़ाई

यह साफ है कि बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव को केवल विकास के दावों के साथ ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ऐतिहासिक गौरव के इर्द-गिर्द लड़ेगी। अशोक सिंघल के मंच से योगी ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में सपा के पुराने रिकॉर्ड और रामद्रोही छवि का मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है।

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