चुनाव आयोग में कलह का असली सच: क्या मुख्य चुनाव आयुक्त से मतभेद या सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल?
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चुनाव आयोग (ECI) के भीतर हाल ही में मची हलचल ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी थी। दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजी गई एक क्लासिफाइड चिट्ठी ने कई अटकलों को जन्म दिया था। अब इस पूरे प्रकरण के पीछे की सच्चाई सामने आ गई है।

क्या थी चिट्ठी के पीछे की असल वजह? सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों के बीच नीतिगत मतभेद हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। यह पूरा विवाद आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर के कामकाज और अधिकारों में किए गए बदलाव से जुड़ा था।

जानकारों का कहना है कि यह कोई संवैधानिक संकट नहीं था। यदि मामला CEC के खिलाफ होता, तो प्रोटोकॉल के अनुसार पत्र राष्ट्रपति को भेजा जाता। चूंकि यह मामला प्रशासनिक पुनर्गठन से संबंधित था, इसलिए इसे कैबिनेट सचिव के पास भेजा गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था, इसलिए उसे कभी लागू ही नहीं किया गया।

डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा कदम आयोग ने स्पष्ट किया है कि ECINet की डेटा सुरक्षा और सेंट्रलाइजेशन को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया गया है, जिसमें आईआईटी और ट्रिपल आईटी के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।

आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में किसी भी आईटी मॉड्यूल में बदलाव करने से पहले अधिकारियों की समिति से चर्चा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और अन्य अधिकारियों के लिए एक्सेस कंट्रोल को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है।

राजनीतिक तापमान और विपक्ष की घेराबंदी इस प्रशासनिक खींचतान को विपक्ष ने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है और मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल की भी बात कही जा रही है। 30 सितंबर को इस मुद्दे पर विपक्ष एक बड़ी बैठक करने जा रहा है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने खुद को इस पूरे विवाद से पूरी तरह अलग रखा है। भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए विपक्ष को हारे हुए और निराश लोगों का गठबंधन करार दिया है।

आयोग का रुख: मतभेद स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा पूरे हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी संस्था में अलग-अलग विचारों पर मंथन होना एक स्वस्थ प्रक्रिया है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) सहित सभी बड़े फैसले पूरी एकजुटता और सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। 26 सितंबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में तीनों शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी ने भी इन दावों को पुख्ता किया है।

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