ट्रंप की घुड़कियों के बीच जोधपुर में गरजे F-35: भारत-अमेरिका के बीच एक हफ्ते में 10 बड़े समझौते
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्ते एक अजीब विरोधाभास से गुजर रहे हैं। एक तरफ ट्रंप के सख्त तेवर और व्यापारिक धमकियां हैं, तो दूसरी तरफ जोधपुर के आसमान में अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की दहाड़ ने दुनिया को चौंका दिया है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप की नीतियां संबंधों को दशकों पीछे धकेल रही हैं, लेकिन रक्षा और सामरिक मोर्चे पर दोनों देशों की जुगलबंदी अपने सर्वोच्च स्तर पर है।

जोधपुर में पहली बार F-35 की गूंज राजस्थान के जोधपुर में चल रहे बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 में अमेरिका ने अपने सबसे एडवांस 5th जनरेशन फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग-II को उतारकर इतिहास रच दिया है। पहली बार अमेरिकी F-35 विमानों ने भारतीय सरजमीं से उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना के साथ टैक्टिकल मिशन में हिस्सा लिया। यह अमेरिका का भारत पर अटूट सामरिक विश्वास दिखाता है।

रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका की नई डील पिछले एक हफ्ते में दोनों देशों के बीच 10 महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जो किसी करीबी सहयोगी के बिना संभव नहीं थे:

  1. C-130J तकनीक का ट्रांसफर: लॉकहीड मार्टिन ने भारत के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोग्राम के लिए स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का बड़ा ऑफर दिया है।
  2. इंजन निर्माण में आत्मनिर्भरता: HAL ने 99 GE F414 इंजनों के सह-उत्पादन में बड़ी प्रगति की है, जो तेजस Mk2 के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा।
  3. स्पेस और टेक निवेश: स्काईरूट एयरोस्पेस अमेरिकी निवेशकों से 300 मिलियन डॉलर जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि मिथिक AI ने बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला है।
  4. उच्च स्तरीय कूटनीति: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ऊर्जा और असैन्य परमाणु सहयोग पर अहम चर्चा की।
  5. क्वाड की सक्रियता: एथेंस में क्वाड राजदूतों की बैठक और फिलीपींस के सुबिक बे में समुद्री सुरक्षा सहयोग ने चीन को कड़ा संदेश दिया है।

खट्टे-मीठे रिश्तों का गणित ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत टैरिफ और इमिग्रेशन पर सख्त नियमों ने व्यापारिक मोर्चे पर तनाव पैदा किया है। ट्रंप की तीखी बयानबाजी से कूटनीतिक असंतुलन की खबरें भी आती रही हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि एशिया में चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका के पास भारत से बेहतर विकल्प नहीं है।

यही कारण है कि व्यापारिक तल्खियों के बावजूद, सामरिक और भू-राजनीतिक स्तर पर भारत-अमेरिका की पार्टनरशिप ने ट्रंप शासन में भी नई ऊंचाइयों को छुआ है। स्पष्ट है कि दोनों देशों के रिश्ते अब केवल शब्दों के मोहताज नहीं, बल्कि आपसी रक्षा जरूरतों की मजबूत नींव पर टिके हैं।

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