IIT बॉम्बे: साहिल वाकोडे मौत मामले में गरमाया माहौल, छात्रों का कैंडल मार्च और निष्पक्ष जांच की मांग
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आईआईटी बॉम्बे में द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के एक सप्ताह बाद भी संस्थान में तनाव बरकरार है। शुक्रवार रात बड़ी संख्या में छात्रों ने परिसर में कैंडल मार्च निकालकर न्याय की गुहार लगाई। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि वे मौजूदा जांच से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें एक स्वतंत्र न्यायिक जांच चाहिए।

जांच समिति पर उठ रहे सवाल छात्रों ने आईआईटी द्वारा गठित 10 सदस्यीय समिति की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि समिति के कुछ सदस्य पहले ही आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के समर्थन में अपना पक्ष रख चुके हैं। छात्रों ने मांग की है कि समिति में कैंपस के कर्मचारियों या छात्रों के बजाय बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। उन्होंने बालचंद्र मुंगेकर और पी. साईनाथ जैसे प्रतिष्ठित नामों को समिति में शामिल करने का सुझाव दिया है।

पुलिस जांच: फोन का लॉक बना पहेली मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले की आपराधिक जांच में जुटी है। अब तक करीब 20 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें छात्र, शिक्षक और परीक्षा निरीक्षक शामिल हैं। हालांकि, मुख्य आरोपी प्रोफेसर दुल्ला का बयान अभी बाकी है। जांच में सबसे बड़ी चुनौती साहिल का मोबाइल फोन है, जो अभी भी पैटर्न लॉक है। पुलिस फोन को अनलॉक करने की कोशिश कर रही है, ताकि मौत से ठीक पहले हुई बातचीत और मिस्ड कॉल्स की सच्चाई सामने आ सके।

माता-पिता का दर्द और जातिगत भेदभाव के आरोप साहिल के माता-पिता ने शुक्रवार को क्राइम ब्रांच कार्यालय में करीब 8 घंटे बिताए। परिवार ने संस्थान प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि साहिल को लगातार जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और अपमान का सामना करना पड़ा। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने प्रोफेसर दुल्ला पर आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। वहीं, संस्थान ने किसी भी प्रकार के भेदभाव से इनकार किया है।

प्रोफेसर छुट्टी पर, निदेशक के इस्तीफे की मांग छात्रों के निरंतर विरोध के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने प्रोफेसर दुल्ला को डीन पद से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया है। लेकिन, अब छात्र संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने बार-बार उठाए गए सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को नजरअंदाज किया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए पुलिस और आईआईटी प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल, सभी की निगाहें साहिल के फोन से मिलने वाली जानकारी और जांच की आगे की दिशा पर टिकी हैं।

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