न्यूयार्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद ईरान न तो झुकेगा और न ही घुटने टेकेगा।
धमकियां नहीं, बराबरी की बात हो पेजेश्कियन ने डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि जितना अधिक दबाव डाला जाएगा, ईरानी जनता का प्रतिरोध उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। संवाद केवल बराबरी के आधार पर ही संभव है।
परमाणु कार्यक्रम पर दोहरे मापदंडों का विरोध ईरानी राष्ट्रपति ने अपने परमाणु कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण का सारा दबाव ईरान पर क्यों है, जबकि परमाणु हथियार तो इजराइल के पास मौजूद हैं। उन्होंने दोहरे मापदंडों की नीति को वैश्विक शांति के लिए हानिकारक बताया।
गाजा मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को घेरा गाजा में जारी हिंसा का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा पर खुला घाव बताया। उन्होंने कहा कि दशकों से चल रहे सैन्य हमलों और घेराबंदी से प्रतिरोध की भावना को खत्म नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, जब तक अन्याय और कब्जा जारी रहेगा, तब तक प्रतिरोध का होना स्वाभाविक है।
पर्दे के पीछे सुलह की कोशिश? दिलचस्प बात यह है कि यह तीखा बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे किसी बड़े समझौते को लेकर चर्चा तेज है। ट्रंप ने भी हाल ही में ईरान के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक को सकारात्मक और आशाजनक करार दिया था। हालांकि, सार्वजनिक मंच पर दोनों देशों का रुख अब भी सख्त बना हुआ है।
Iranian President Masoud Pezeshkian:
— Clash Report (@clashreport) September 23, 2026
Atomic and nuclear bombs are in the hands of the Israeli regime, but the inspectors are requested to come to Iran.
Israel has murdered savagely over 70,000 innocents in Gaza, but Iran, while behind the table of negotiation, was bombed.… pic.twitter.com/0GNiCBTlhN
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