न्यूयॉर्क: लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने शांति का एक नया प्रस्ताव रखा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक 7-दिवसीय योजना पेश की है।
ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, यह योजना जून में हुए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर आधारित है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव को कम करना और अमेरिका के साथ रुकी हुई वार्ता को दोबारा पटरी पर लाना है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यदि अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार करता है, तो सातवें दिन तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू हो जाएगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि शांति बहाली के लिए अमेरिका को क्षेत्र में अपने सैन्य आक्रामक कदमों पर लगाम लगानी होगी। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फैली असुरक्षा के लिए केवल ईरान को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है।
ईरान का मानना है कि यदि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले यह समझौता हो जाता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ईरान ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। विदेश मंत्री अरगची ने जोर दिया कि बातचीत में ईरान के प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वार्ता के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को भी एजेंडे में शामिल करना होगा।
इस दौरान अरगची ने जर्मनी सहित कई यूरोपीय देशों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये देश अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन और उसके दबावपूर्ण रवैये पर चुप्पी साधे हुए हैं।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएन चार्टर का ईमानदारी से पालन करना अनिवार्य है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह ईरान के इस 7-दिवसीय शांति फॉर्मूले पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi and his accompanying delegation attend the opening address of the 81st session of the United Nations General Assembly, delivered by UN Secretary-General António Guterres. pic.twitter.com/JYyr72qvei
— Alireza Akbari (@itsalireza_akb) September 22, 2026
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