इतिहास में कई ऐसे किरदार हुए हैं जिन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा के लिए कानून और प्रकृति दोनों को ताक पर रख दिया। ऐसा ही एक नाम है फ्रेडरिक विल्सन। एक ब्रिटिश सैनिक जो हत्या के आरोप से बचने के लिए भागा और अंत में हिमालय के एक बड़े हिस्से का बेताज बादशाह बन बैठा।
ब्रिटिश सेना से भागकर हिमालय तक का सफर फ्रेडरिक विल्सन ब्रिटिश इंडियन आर्मी का एक साधारण सिपाही था, जो मसूरी छावनी में तैनात था। कहा जाता है कि एक साथी सैनिक की हत्या के बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तर की ओर भाग निकला। वह भटकते हुए टिहरी गढ़वाल की रियासत पहुँचा, लेकिन वहां उसे काम नहीं मिला। आखिर में वह भागीरथी घाटी के हर्षिल पहुँचा और वहीं बस गया।
हिरनों की बलि और कस्तूरी का व्यापार हर्षिल में बसने के बाद विल्सन ने एक स्थानीय महिला से विवाह किया। उसके बाद उसने अपनी कमाई का जरिया बनाया कस्तूरी हिरनों को। उसने बड़ी संख्या में इन हिरनों का शिकार किया और भारत के बाहर कस्तूरी व उनकी खाल बेचकर भारी मुनाफा कमाया। यह उसकी धन-दौलत बनाने की शुरुआत थी।
देवदार के जंगलों का काल विल्सन की असली नजर हिमालय के देवदार के जंगलों पर थी। उसने लकड़ी के व्यापार के लिए राजा से अनुमति मांगी, लेकिन शुरुआत में असफलता हाथ लगी। हालांकि, जब ब्रिटिश सरकार ने रेलवे का विस्तार तेज किया, तो टिहरी के राजा ने उसे लकड़ी काटने की अनुमति दे दी।
नदी को बनाया लकड़ी ढोने का जरिया विल्सन ने भागीरथी नदी के किनारे अत्याधुनिक मशीनें लगवाईं। उसने लाखों टन देवदार के बेशकीमती पेड़ कटवाए और नदी के बहाव का उपयोग करके लकड़ियों को हरिद्वार तक पहुँचाना शुरू किया। हिमालय की हरियाली को मुनाफे में बदलने का यह सिलसिला इतना बड़ा था कि लोग उसे हिमालय बेचने वाला कहने लगे थे।
हर्षिल का बेताज बादशाह विल्सन अपनी ताकत के नशे में इतना चूर हो गया कि उसने अपने नाम के सिक्के तक चलवा दिए थे। उसने हर्षिल में देवदार की लकड़ियों से एक भव्य महल भी खड़ा किया। वह एक तरह से उस क्षेत्र का राजा बन चुका था।
पर्यावरण का बड़ा नुकसान हालांकि, विल्सन की इस विनाशकारी कार्यशैली ने हिमालय को अपूरणीय क्षति पहुँचाई। मशहूर पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन के जनक सुंदरलाल बहुगुणा ने उत्तर भारत के वनों की तबाही के लिए फ्रेडरिक विल्सन को ही सबसे बड़ा गुनहगार माना था। विल्सन का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि किस तरह लालच ने कभी हिमालय की गोद को उजाड़ने का काम किया था।
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— News18 India (@News18India) September 23, 2026
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