जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के देगवार गांव के किसान अमरजीत सिंह ने खेती के साथ मधुमक्खी पालन को अपनाकर नई मिसाल पेश की है। कृषि विभाग की तकनीकी सहायता से शुरू हुआ उनका यह छोटा सा कदम आज एक सफल व्यवसाय में बदल चुका है। अमरजीत बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों की समय-समय पर मॉनिटरिंग और बीमारियों से बचाव की जानकारी ने उन्हें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है।
क्या है नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन ? अमरजीत सिंह की सफलता कोई इकलौती कहानी नहीं है। केंद्र सरकार नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन (NBHM) के जरिए मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक आधार दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य शहद उत्पादन बढ़ाना, छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
सिर्फ शहद ही नहीं, ये उत्पाद भी हैं कमाई का जरिया मधुमक्खी पालन का दायरा सिर्फ शहद तक सीमित नहीं है। इससे बीवैक्स (मोम), बी पोलन, प्रोपोलिस और रॉयल जेली जैसे बेशकीमती उत्पाद भी मिलते हैं। इसके अलावा, मधुमक्खियां फसलों के परागण (Pollination) में मदद करती हैं, जिससे खेतों की पैदावार में काफी बढ़ोतरी होती है।
सरकार दे रही है मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार इस मिशन के तहत केवल ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड बीकीपिंग डेवलपमेंट सेंटर्स और अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब्स भी उपलब्ध करा रही है। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 7 वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग लैब्स, 66 मिनी लैब्स और 83 प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जा चुकी हैं। ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए भी बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
सब्सिडी कैसे मिलेगी? NBHM के तहत मिलने वाली मदद प्रोजेक्ट-बेस्ड होती है। यानी, हर किसान के लिए सब्सिडी की राशि उसकी परियोजना, पात्रता और गतिविधि के आधार पर तय होती है। इच्छुक किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने राज्य के स्थानीय कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय में जाकर नवीनतम गाइडलाइंस और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
दोगुना हुआ शहद का उत्पादन देश में मधुमक्खी पालन के प्रति बढ़ता क्रेज आंकड़ों में भी साफ दिखता है। भारत में शहद का उत्पादन साल 2014-15 में 80,530 मीट्रिक टन था, जो 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक बढ़कर 1,51,690 मीट्रिक टन तक पहुँच चुका है।
कैसे करें शुरुआत? यदि आप भी मधुमक्खी पालन शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क करें। अपने क्षेत्र की जलवायु, फूलों की उपलब्धता और मधुमक्खी की कॉलोनियों के प्रबंधन के बारे में ट्रेनिंग लेना पहला कदम है। विभागीय गाइडेंस के साथ मिलकर इस काम को व्यवस्थित करने से आप भी खेती के साथ अतिरिक्त और स्थायी आय का जरिया बना सकते हैं।
*#WATCH | Poonch, J&K: A farmer produces organic honey from honey bees with the help of the Agriculture Department on his farm in Degwar village.
— ANI (@ANI) September 23, 2026
Farmer Amarjeet Singh says, I would like to thank the department; it was through their information that we learned about this and… pic.twitter.com/Bwi63LLknq
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