मोदी की क्लास : मंत्रियों का होगा रिपोर्ट कार्ड, तय करेगा कैबिनेट का भविष्य
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार एक बार फिर ऑडिट मोड में है। 23 और 24 सितंबर को आयोजित चिंतन शिविर में कैबिनेट मंत्रियों का भविष्य तय किया जाएगा। इस बार का मंथन विकसित भारत 2047 की थीम पर आधारित है, जहां हर मंत्री को अपने मंत्रालय का लेखा-जोखा पेश करना होगा।

प्रेजेंटेशन से रिपोर्ट कार्ड तक का सफर

आज चिंतन शिविर के पहले दिन सभी कैबिनेट मंत्री अपने-अपने मंत्रालय के कार्यों का प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। कल यानी दूसरे दिन प्रधानमंत्री इन प्रेजेंटेशन की समीक्षा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों को एक्सीलेंट , गुड , एवरेज और पुअर श्रेणी में बांटा जाएगा। एवरेज और पुअर रेटिंग वाले मंत्री रेड जोन में होंगे, जिसका सीधा अर्थ है कि आने वाले कैबिनेट विस्तार में उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है।

सिर्फ कैबिनेट मंत्रियों की क्लास

इस बार का शिविर खास है क्योंकि इसमें राज्य मंत्रियों के बजाय केवल कैबिनेट मंत्रियों को बुलाया गया है। पीएम मोदी पहले ही स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ समीक्षा पूरी कर चुके हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि सरकार शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए एक सख्त प्रक्रिया अपना रही है।

4 अहम मुद्दों पर होगी कड़ी पूछताछ

कैबिनेट मंत्रियों के प्रेजेंटेशन का मुख्य फोकस 4 बिंदुओं पर है:

  1. जेन-जी (Gen-Z) से जुड़ाव: युवा पीढ़ी से तालमेल के लिए मंत्रियों ने अब तक क्या किया और उनके क्षेत्र में युवाओं की मुख्य समस्याएं क्या हैं।
  2. महिला आरक्षण बिल: अप्रैल में गिरे 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा कैसे पास कराया जाए, इस पर मंत्रियों से सुझाव मांगे गए हैं।
  3. UGC और शिक्षा: यूजीसी के कामकाज और शिक्षा क्षेत्र में युवाओं की राय व संतुष्टि का स्तर।
  4. रोजगार की स्थिति: युवाओं के बीच रोजगार को लेकर क्या धारणा है और मंत्री के पास इस मुद्दे को सुलझाने का क्या ठोस प्लान है।

पुराना अनुभव और भविष्य की रणनीति

मोदी सरकार के लिए यह कोई नई कवायद नहीं है। इससे पहले 2021 में भी पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद के साथ 5 चिंतन शिविर किए थे, जिसमें मंत्रियों को समूहों में बांटकर प्रशासनिक सुधारों पर काम सौंपा गया था। हालांकि, इस बार का रुख और अधिक कठोर है, क्योंकि आने वाला कैबिनेट फेरबदल पूरी तरह से इसी रिपोर्ट कार्ड पर टिका होगा।

अब देखना यह है कि कौन सा मंत्री ग्रीन जोन में अपना स्थान सुरक्षित रख पाता है और कौन रेड जोन में फंसकर पद खोता है।

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