निर्वाचन आयोग के अंदर कथित मतभेदों की खबरें सामने आने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के निर्णयों पर 14 बार आपत्ति जताई है। यह विवाद मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से जुड़ा है।
आयोग का पक्ष: टिप्पणी को असहमति न माना जाए विवाद बढ़ता देख चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों को औपचारिक असहमति (Dissent) नहीं माना जा सकता। आयोग का कहना है कि विचार-विमर्श के दौरान सवाल पूछना या टिप्पणी देना सामान्य प्रक्रिया है। अंततः सभी आदेशों पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं, जिसका अर्थ है कि फैसलों पर उचित विचार किया गया था।
राहुल गांधी: वोट चोरी राजद्रोह के समान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे संविधान पर सीधा हमला और वोट चोरी करार दिया है। राहुल का आरोप है कि भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने मिलकर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने इसे राजद्रोह बताते हुए न्याय की मांग की है।
विपक्ष का चौतरफा हमला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांगा है। उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान 31 राज्यों में 13.8 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की है।
कानूनी जानकारों और आप नेताओं की मांग अरविंद केजरीवाल ने पूरी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। वहीं, वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की मांग की है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मांग की है कि चुनाव आयोग को वे सभी डिसेंट नोट (असहमति पत्र) सार्वजनिक करने चाहिए जो आयुक्तों ने दर्ज कराए थे।
लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत? प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है। विपक्ष का तर्क है कि यदि एक स्वतंत्र संस्था के भीतर सदस्य खुद फैसलों से असहमति जता रहे हैं, तो आम चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है। फिलहाल, आयोग की सफाई और विपक्ष के आरोपों के बीच यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ चुका है।
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 23, 2026
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served. pic.twitter.com/30kX06CBiH
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