भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों का आधिकारिक खंडन किया है। आयोग ने साफ किया है कि संस्थान के भीतर अलग-अलग राय और चर्चाएं निर्णय लेने की एक सामान्य प्रक्रिया है।
क्या है पूरा मामला? हाल ही में मीडिया में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में SIR के विभिन्न पहलुओं पर चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्तियां जताई थीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग ने कहा कि कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स के आधार पर निष्कर्ष निकालना पूरी तस्वीर के साथ न्याय नहीं है।
आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत राय से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, ड्राफ्टिंग और निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों और तकनीकी टिप्पणियों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना होता है।
पूर्ण कानूनी वैधता का दावा आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेश और निर्देश मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हैं। इन्हें पूरा कानूनी समर्थन प्राप्त है। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पारदर्शिता और सुरक्षा पर जोर ECI ने डेटा सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। इसके अलावा, हाल के महीनों में बिहार, केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न हुए हैं, जो आयोग की प्रशासनिक मजबूती का प्रमाण हैं।
संस्थान के लिए सामान्य है मतभेद आयोग ने जोर देकर कहा कि किसी भी संस्था में अंतिम फैसले पर पहुंचने से पहले विभिन्न दृष्टिकोणों का सामने आना एक सामान्य प्रक्रिया है। पिछले एक साल में आयोग ने 40 से अधिक नई पहल की हैं और कई चुनावी सुधार लागू किए हैं, जो पूरी तरह से आयोग के सामूहिक फैसलों का परिणाम हैं।
Election Commission releases press note following Indian Express report on 2 ECs objecting to discrepancies in SIR process
— ANI (@ANI) September 23, 2026
Differing views and observations are a normal part of deliberation in any institution. They are a part of the decision-making process before a final… pic.twitter.com/96Xchrfazh
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