वोट चोरी देशद्रोह है : राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, कहा- समय आने पर बख्शा नहीं जाएगा
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नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने वोट चोरी को भारतीय जनता के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला करार दिया है। राहुल का यह हमला एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का दावा किया गया है।

क्या है वोट चोरी का विवाद? राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, चुनाव आयोग और उससे जुड़े अधिकारी जो कर रहे हैं, वह गलत है। यह देशद्रोह है। यह मत भूलना कि समय आएगा, हम तुम्हें पकड़ लेंगे और बख्शा नहीं जाएगा। राहुल ने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।

SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल विवाद की जड़ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में इस प्रक्रिया से जुड़े आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई है। आरोप है कि बावजूद आपत्तियों के, इन फैसलों को लागू किया गया।

कांग्रेस का हमला: चुनाव आयोग को कौन चला रहा है? कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस मामले को संवैधानिक संकट बताया है। तिवारी ने कहा कि यदि दो आयुक्त लगातार आपत्ति जता रहे थे, तो फिर फैसले कैसे लिए गए? उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, जो इसे गैर-संवैधानिक बनाता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ये तथ्य सही हैं, तो यह महाभियोग का मामला हो सकता है।

लोकतंत्र की हत्या का कार्यालय वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक तरह से लोकतंत्र की हत्या का कार्यालय खोल दिया है। सिंघवी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने न केवल देश को गुमराह किया है, बल्कि अपने साथी आयुक्तों के साथ भी पारदर्शिता नहीं बरती। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सभी चुनाव आयुक्त बराबर होते हैं, CEC केवल बराबर वालों में पहला होता है।

चुनाव आयोग का पक्ष विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी है। आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि SIR से संबंधित सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने मीडिया में चल रही आपत्तियों की खबरों को सिरे से खारिज किया है।

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