विवेक तिवारी हत्याकांड: सिपाही को 10 साल की सजा, भड़कीं पत्नी ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का रास्ता चुना
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लखनऊ के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में सत्र अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया है।

वो काली रात और विवेक की हत्या यह घटना 28 सितंबर 2018 की है। देर रात करीब 1:30 बजे विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान को घर छोड़ने जा रहे थे। गोमतीनगर विस्तार के पास पुलिस पिकेट पर तैनात सिपाही प्रशांत चौधरी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से विवेक पर गोली चला दी। गंभीर रूप से घायल विवेक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

दो एफआईआर और घटना की परतें हत्याकांड के बाद मामले में दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थीं। पहली रिपोर्ट सना खान ने दर्ज कराई थी, जबकि दूसरी रिपोर्ट विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने दर्ज करवाई। रिपोर्ट के अनुसार, मौके पर मौजूद सिपाही प्रशांत चौधरी ने न केवल विवेक पर गोली चलाई, बल्कि सना खान के साथ भी मारपीट की थी और गाड़ी के बोनट पर डंडे बरसाए थे।

पत्नी का ऐलान: अभी जंग बाकी है अदालत के फैसले से विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी बेहद असंतुष्ट हैं। उन्होंने दूसरे सिपाही संदीप के बरी होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। कल्पना का कहना है कि जब घटना के वक्त दोनों सिपाही साथ थे, तो संदीप ने प्रशांत को गोली चलाने से क्यों नहीं रोका? उन्होंने आरोपी को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगी।

न्याय की राह में चुनौती कल्पना तिवारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिल जाता, वह पीछे नहीं हटेंगी। उनका तर्क है कि दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका इस हत्या में बराबर थी, ऐसे में एक को बरी कर देना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं।

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