भारतीय क्रिकेट के इतिहास में टाइगर पटौदी का नाम केवल रनों या शतकों के लिए नहीं, बल्कि उस अदम्य इच्छाशक्ति के लिए दर्ज है, जिसने हार मानना सीखा ही नहीं था। मंसूर अली खान पटौदी का 22 सितंबर 2011 को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर, क्रिकेट जगत उस महान नायक को याद कर रहा है जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया।
मंसूर अली खान पटौदी ने केवल 21 साल और 77 दिन की उम्र में भारतीय टीम की कमान संभाली थी। यह मौका उन्हें मार्च 1962 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान तब मिला, जब नियमित कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर चोटिल हो गए। उस समय तक पटौदी ने केवल तीन टेस्ट मैच खेले थे, लेकिन उनकी लीडरशिप ने जल्द ही भारतीय क्रिकेट को एक नया नजरिया दिया। उन्होंने भारत के लिए कुल 46 टेस्ट खेले, जिनमें से 40 में कप्तानी की।
पटौदी के करियर का सबसे संघर्षपूर्ण मोड़ 1961 में आया, जब इंग्लैंड में एक कार दुर्घटना में उनकी दाईं आंख की रोशनी चली गई। डॉक्टरों को लगा कि उनका करियर खत्म हो गया, लेकिन पटौदी ने हार नहीं मानी। अभ्यास के दौरान जब उन्हें गेंद दो दिखाई देती, तो उन्होंने अपनी कैप को इस तरह सेट करना सीखा कि दाईं आंख ढक जाए और वह बाईं आंख से गेंद को फोकस कर सकें। इसी तकनीक के साथ उन्होंने न केवल वापसी की, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में छह शानदार शतक भी जड़े।
पटौदी की कप्तानी का स्वर्णिम अध्याय 1967-68 में न्यूजीलैंड दौरे पर आया। उनकी अगुवाई में भारत ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज 3-1 से जीतकर इतिहास रचा। यह भारत की विदेशी जमीन पर पहली टेस्ट सीरीज जीत थी। पटौदी ने भारतीय टीम की ताकत को पहचाना और तेज गेंदबाजी के बजाय स्पिन आक्रमण और फील्डिंग पर जोर दिया, जो उस दौर में एक क्रांतिकारी कदम था।
शाही पटौदी खानदान से ताल्लुक रखने वाले मंसूर अली खान का व्यक्तित्व मैदान पर बहुत प्रभावशाली था। उनके साथी खिलाड़ी अक्सर उनके आत्मविश्वास और रॉयल अंदाज का जिक्र करते हैं। सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों ने हमेशा उन्हें अपना हीरो माना। गावस्कर ने तो एक बार कहा था कि एक आंख से लगभग 3,000 रन बनाना एक असाधारण उपलब्धि है।
पटौदी को 1964 में अर्जुन पुरस्कार और 1967 में पद्म श्री से नवाजा गया था। उनके सम्मान में बीसीसीआई ने मंसूर अली खान पटौदी मेमोरियल लेक्चर की शुरुआत की। आज भले ही टाइगर पटौदी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनके द्वारा डाली गई पेशेवर सोच और आक्रामकता की नींव आज भी टीम इंडिया को प्रेरित करती है।
India vs Aus Melbourne Test history :
— Anup (@IamAnupPall) December 21, 2024
1967-68 : India : 173 & 146.
captain Mansur Ali Khan Pataudi scored 75 & In 2nd innings Wadekar scored 99,Tiger scored 85 off 157.
India lost the match. | #INDvsAUS pic.twitter.com/JlFxmThhcX
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