उत्तराखंड के गांवों में होम स्टे से बदली तस्वीर: 6,500 प्रवासियों ने घर वापसी कर शुरू किया नया सफर
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उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि पर्यटकों की चहल-पहल सुनाई दे रही है। होम स्टे (Homestay) मॉडल यहां के युवाओं और प्रवासियों के लिए स्वरोजगार का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। राज्य में आज 5,000 से अधिक होम स्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

गांव वापसी की नई लहर

कोरोना काल के बाद शुरू हुए रिवर्स माइग्रेशन (गांव वापसी) ने पहाड़ों की सूरत बदल दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6,500 से अधिक लोग अपने मूल गांवों में लौट चुके हैं। इनमें से करीब 22 प्रतिशत लोगों ने होम स्टे को अपना आजीविका का मुख्य साधन बनाया है। यह पहल न केवल पलायन रोकने में कारगर साबित हो रही है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी पुनर्जीवित कर रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

होम स्टे केवल ठहरने की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र बन रहे हैं। पर्यटकों के आने से स्थानीय टैक्सी सेवाओं, गाइड, ट्रेकिंग, हस्तशिल्प और पहाड़ी कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। इससे गांवों में स्वरोजगार के अन्य छोटे-बड़े अवसर भी पैदा हो रहे हैं, जिसका सीधा लाभ स्थानीय परिवारों को मिल रहा है।

सरकार दे रही विशेष प्रोत्साहन

उत्तराखंड सरकार दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के जरिए इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रही है। अब तक 537 लाभार्थियों को करीब 79.28 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है। यह योजना स्थानीय लोगों को अपने घरों में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने में मदद करती है। आवेदन प्रक्रिया सरल है, जिसमें जिला स्तरीय समिति द्वारा जांच के बाद बैंकों के माध्यम से ऋण की सुविधा दी जाती है।

क्या हैं होम स्टे के नियम?

राज्य सरकार ने इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं:

संस्कृति और पर्यटन का अनूठा संगम

होम स्टे का सबसे सकारात्मक पक्ष यह है कि पर्यटक अब होटलों के बजाय स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को अनुभव करना पसंद कर रहे हैं। इससे पर्यटकों को उत्तराखंड की परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण परिवेश से जुड़ने का मौका मिल रहा है। साथ ही, स्थानीय लोग अपनी संस्कृति को पर्यटकों के जरिए विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में सफल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का लक्ष्य स्पष्ट है—पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना जैसी अन्य पहलों के साथ मिलकर, होम स्टे मॉडल उत्तराखंड को पर्यटन के मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान दिला रहा है।

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