मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में एक छात्र की आत्महत्या के बाद उपजा विवाद गहराता जा रहा है। संस्थान में माहौल तनावपूर्ण है, जहां एक ओर छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फैकल्टी फोरम ने आरोपी प्रोफेसर का समर्थन कर स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
क्या है पूरा मामला? दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र की खुदकुशी के बाद, मृतक के माता-पिता ने पूर्व डीन (छात्र मामले) प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर जातिगत भेदभाव और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। छात्र को कथित तौर पर परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े जाने के बाद ये दुखद घटना हुई थी।
छात्रों का उग्र विरोध और मांगें कैंपस में प्रदर्शन सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहा। छात्रों ने संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे के इस्तीफे की मांग की है। छात्रों का कहना है कि संस्थान में हाल के वर्षों में हुई चार मौतों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि एक ऐसी विशेष समिति बनाई जाए जिसमें बाहरी सदस्य, प्रोफेसर और छात्र प्रतिनिधि शामिल हों, जो 30 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
फैकल्टी फोरम का विवादित रुख करीब 750 फैकल्टी सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में खुलकर बयान जारी किया है। फोरम ने डूला को प्रतिष्ठित और पुरस्कार विजेता बताते हुए उनके खिलाफ लगे आरोपों को झूठा और भ्रामक करार दिया है। फोरम का कहना है कि डूला को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटाया गया है और वे अभी भी संस्थान का हिस्सा हैं।
फैकल्टी के भीतर भी असंतोष फैकल्टी फोरम का यह रुख संस्थान के अंदर ही विवाद का कारण बन गया है। प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोडे ने फोरम को ईमेल लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित प्रोफेसर को निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि फोरम का एकतरफा समर्थन करना संवेदनशील मामले में संवेदनहीनता दर्शाता है और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
संस्थान पर बढ़ता दबाव सोमवार को कैंपस में सभी लेक्चर रद्द कर दिए गए और पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में भी लिया। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने भी छात्र के समर्थन में प्रदर्शन किया है। हालांकि निदेशक शिरीष केदारे ने छात्रों के मांगों के चार्टर को स्वीकार कर लिया है और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपात बैठक भी बुलाई गई है, लेकिन अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष पर न पहुंचने के कारण गुस्सा बरकरार है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन छात्रों के दबाव में आकर किसी निष्पक्ष जांच के लिए तैयार होता है, या फिर फैकल्टी और छात्रों के बीच का यह टकराव और गहराएगा।
IIT Bombay faculty hold a solidarity march in support of Prof. Suryanarayana Doolla. #IIT #IITBombayProtest pic.twitter.com/dmStdftBm6
— Deepak Singh (@SinghDeepakUP) September 21, 2026
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