सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों को तीन बड़ी इकाइयों में मिलाने का आदेश दे दिया है। इस दावे ने बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच भारी भ्रम पैदा कर दिया है।
वायरल हो रहे डॉक्यूमेंट में वित्त मंत्रालय के आधिकारिक ‘राजपत्र’ (गजट) होने का दावा किया गया है। इसके अनुसार, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को SBI में विलय करने की बात कही गई है। साथ ही, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को PNB में तथा केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाने का झूठा दावा किया गया है।
पीआईबी (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इस वायरल डॉक्यूमेंट को सिरे से खारिज कर दिया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है और यह पूरी तरह से फर्जी है। यह पहली बार नहीं है जब बैंकों के मर्जर को लेकर ऐसी अफवाहें फैलाई गई हैं। जून में भी इसी तरह का एक फर्जी ग्राफिक वायरल हुआ था, जिसे तब भी सरकारी एजेंसी ने निराधार बताया था।
इस फर्जी खबर के भरोसेमंद लगने के पीछे का मुख्य कारण 2019 का वास्तविक मर्जर है। उस समय सरकार ने 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़ी इकाइयों में तब्दील कर दिया था, जिससे सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। लोग इसी पुराने इतिहास के कारण इन फर्जी दावों पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं।
बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, इस तरह के बड़े प्रशासनिक फैसले कभी भी सोशल मीडिया पर जारी एक डॉक्यूमेंट से नहीं होते। बैंकों के मर्जर के लिए एक लंबी और औपचारिक प्रक्रिया होती है। इसमें वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका और संसद की मंजूरी अनिवार्य होती है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से बैंकों के किसी भी नए मर्जर का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार की ओर से सलाह दी गई है कि बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी किसी भी संवेदनशील खबर पर भरोसा करने से पहले हमेशा वित्त मंत्रालय या आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर ही जानकारी हासिल करें। किसी भी अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करने से बचें।
A document circulating on social media, purportedly issued by the Ministry of Finance, claims that the Central Government has notified a scheme for the amalgamation of Public Sector Banks.#PIBFactCheck:
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 16, 2026
❌ The document is #Fake and has NOT been issued by @FinMinIndia.
🔰… pic.twitter.com/nCbOS9fRFX
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