दिल्ली में थमा DTC बसों का पहिया: सैलरी नहीं, इन 9 मांगों के लिए सड़क पर उतरे ड्राइवर-कंडक्टर
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राजधानी दिल्ली में DTC बस सेवा ठप होने से आम जनता का हाल बेहाल है। हजारों बसें डिपो में खड़ी हैं और यात्री घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करने को मजबूर हैं। करीब 12 हजार ड्राइवर और कंडक्टरों की इस हड़ताल ने पूरी दिल्ली की रफ्तार रोक दी है।

हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे शहर की लाइफलाइन चलाते हैं, लेकिन शोषण का शिकार हो रहे हैं। यह प्रदर्शन केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर है।

क्या हैं ड्राइवरों-कंडक्टरों की 9 बड़ी मांगें?

  1. दैनिक वेतन में बढ़ोतरी: कर्मचारी अपनी दिहाड़ी बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भारी वाहन चलाने की जिम्मेदारी और ट्रेनिंग के हिसाब से मौजूदा 747-862 रुपये बहुत कम हैं।
  2. महंगाई भत्ता (DA): पिछले डेढ़ साल से DA में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि इसे नियमों के अनुसार समय पर बढ़ाया जाए।
  3. बेसिक वेतन में इंक्रीमेंट: साल 2019 के बाद से बेसिक वेतन में कोई इंक्रीमेंट नहीं मिला है। 2024 से लंबित इस इंक्रीमेंट को तुरंत लागू करने की मांग है।
  4. सरकारी छुट्टियों का भुगतान: जिन कर्मचारियों की ड्यूटी सरकारी छुट्टियों के दिन लगती है, उन्हें उसका उचित भुगतान मिलना चाहिए।
  5. सालाना बोनस: संविदा (Contract) पर काम कर रहे कर्मचारियों ने भी नियमित कर्मचारियों की तरह सालाना बोनस की मांग रखी है।
  6. मेडिकल सुविधा और बीमा: बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों के पास कोई मेडिकल कवर नहीं है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
  7. सोशल सिक्योरिटी: कर्मचारी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए पीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग कर रहे हैं।
  8. पेड लीव की सुविधा: छुट्टी लेने पर वेतन कटने की समस्या से बचने के लिए कर्मचारी निर्धारित पेड लीव (सवैतनिक अवकाश) की सुविधा चाहते हैं।
  9. अनुभव का सम्मान: 10-15 साल के अनुभवी ड्राइवरों को भी अनस्किल्ड कैटेगिरी में रखना गलत है। वे अपने अनुभव के आधार पर उचित श्रेणी और वेतनमान चाहते हैं।

यात्रियों की मुश्किलें और सरकार का रुख

हड़ताल के कारण बसों की कमी से मेट्रो और कैब पर यात्रियों का भारी दबाव बढ़ गया है। यात्रियों को राहत देने के लिए DMRC को अतिरिक्त ट्रेनें चलानी पड़ रही हैं।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि ये कर्मचारी निजी एजेंसियों और कंसेशनायरों के अधीन हैं, इसलिए उन्हें सीधे सरकारी खजाने से वेतन नहीं दिया जा सकता। सरकार के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी संबंधित कंपनियों के माध्यम से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार है और दिल्ली की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है।

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