देश में UPI पेमेंट के नए नियमों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। आरोप है कि अमेरिकी कंपनियों के दबाव में आकर सरकार ने UPI के नियमों में बदलाव किया है।
सुधाकर सिंह का तीखा हमला आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि UPI ने वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) के सामने घुटने नहीं टेके हैं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के दबाव में आकर यह फैसला लिया है।
आका का कॉल और बदल गया नियम सांसद का कहना है कि लोग तेजी से विदेशी कार्ड नेटवर्क छोड़कर UPI अपना रहे थे, जिससे अमेरिकी कंपनियों का कारोबार प्रभावित हो रहा था। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, तभी आता है आका का कॉल और मोदी जी नतमस्तक हो जाते हैं।
2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर शुल्क विवाद का मुख्य केंद्र UPI के जरिए होने वाले व्यापारी भुगतान (Merchant Payment) पर लगने वाला 0.4% MDR शुल्क है। आरजेडी का आरोप है कि 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर यह शुल्क लगाकर सरकार ने अमेरिकी कंपनियों को खुश करने का रास्ता साफ कर दिया है।
डिजिटल इंडिया पर उठे सवाल आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि जो सरकार कभी डिजिटल इंडिया का ढोल पीट रही थी, अब उसने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के बाद डिजिटल भुगतान पर भी टैक्स लगा दिया है। विपक्ष इसे आत्मनिर्भर भारत की जगह विदेशी दबाव में झुकना बता रहा है।
सियासत और जनता का बोझ एक तरफ जहां सरकार डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बात करती है, वहीं इस नए शुल्क ने आम जनता और व्यापारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। क्या वाकई यह फैसला अमेरिकी दबाव का परिणाम है या व्यवस्थागत बदलाव? यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
UPI ने Visa और Mastercard के आगे सरेंडर नहीं किया है…
— Sudhakar Singh (रोज़गार जहाँ, वोट वहाँ) (@_Sudhaker_singh) September 16, 2026
बल्कि 56 इंच वाले मोदी जी ने ट्रम्प के आगे सरेंडर कर दिया है!
UPI का पूरा खेल समझिए।
लोग अब Visa और Mastercard जैसे अमेरिकी कार्ड नेटवर्क का इस्तेमाल लगभग छोड़कर UPI पर आ गए थे। इससे अमेरिकी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ना… pic.twitter.com/jFhZ8ms8cl
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