मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने का हौसला हर किसी में नहीं होता। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी संघर्ष की एक ऐसी कहानी साझा की है, जो साबित करती है कि बड़े सपनों के लिए जोखिम उठाना कितना जरूरी है।
किराये के कमरे से तंग आकर लिया फैसला 1976-77 का दौर था। अनिल अग्रवाल अपना परिवार लेकर मुंबई में एक छोटे से किराये के कमरे में रह रहे थे। उस कमरे में न तो परिवार के लिए पर्याप्त जगह थी और न ही उनके बड़े सपनों के लिए कोई गुंजाइश। तभी उन्होंने ठान लिया कि चाहे जो हो जाए, अपना घर तो खरीदना ही है।
लोगों की सलाह को किया दरकिनार जब उन्होंने घर खरीदने की बात की, तो आसपास के लोगों ने उन्हें अव्यावहारिक बताते हुए रोकने की कोशिश की। ज्यादातर लोगों का यही कहना था कि इतनी जल्दी घर खरीदना बुद्धिमानी नहीं है। अगर लेना ही है, तो मुंबई के उपनगरों (suburbs) में देखें, जहाँ घर सस्ता और बड़ा मिलेगा। लेकिन अग्रवाल का विजन कुछ और ही था।
मालाबार हिल्स की जिद और 333 वर्गफुट का आशियाना लोगों की सलाह को अनसुना कर अनिल अग्रवाल ने मालाबार हिल्स जैसा पॉश इलाका चुना। उनकी तलाश पेद्दार रोड के नवरंग अपार्टमेंट में जाकर खत्म हुई। वहां उन्हें 333 वर्गफुट का एक घर पसंद आया, लेकिन उस समय उनके बैंक खाते में केवल 75,000 रुपये थे। घर महंगा था, लॉजिक कहता था कि रुक जाओ, लेकिन उनका दिल कहता था—यही सही समय है।
साहस की जीत अनिल अग्रवाल ने उस चुनौती को स्वीकार किया और मकान खरीद लिया। वे कहते हैं कि यह सिर्फ एक ईंट-पत्थर का घर नहीं था, बल्कि एक विश्वास था। उन्होंने उस वक्त खुद से कहा था, अगर मैं मुंबई में घर खरीद सकता हूं, तो दुनिया के किसी भी कोने में अपना साम्राज्य खड़ा कर सकता हूं।
आज 55 हजार करोड़ की नेटवर्थ जिस शख्स ने कभी 333 वर्गफुट के मकान के लिए संघर्ष किया था, आज उनकी नेटवर्थ करीब 55,000 करोड़ रुपये है। उनकी कंपनी वेदांता समूह का मार्केट कैप 2.35 लाख करोड़ रुपये के करीब है। दिलचस्प बात यह है कि आज वे लंदन में बकिंघम पैलेस के पास एक 50,000 वर्गफुट के महलनुमा घर में रहते हैं। उनके मौजूदा बंगले का सिर्फ हॉल ही उनके पहले घर से कई गुना बड़ा है, जो उनकी जीरो से हीरो तक की यात्रा को बयां करता है।
1976-77 के आसपास की बात है। Mumbai आए हुए कुछ समय हो गया था और परिवार साथ रहने लगा था। अब किराए के कमरे में ना मेरे अपनों के लिए जगह थी, ना मेरे सपनों के लिए।
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) September 17, 2026
कई लोगों ने सलाह दी, इतनी जल्दी अपना घर मत लो। और लेना भी है तो Mumbai के suburbs में लो। बड़ा मिलेगा, सस्ता मिलेगा। … pic.twitter.com/qxTbetutcy
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