IPS बुशरा बानो का अचानक तबादला: क्या धार्मिक अभिवादन बना वजह? अनुज चौधरी से क्यों हो रही तुलना
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पश्चिम बंगाल में पदस्थ IPS अधिकारी बुशरा बानो का महज ढाई महीने के भीतर हुआ तबादला सुर्खियों में है। खड़गपुर में ASP के पद पर तैनात बुशरा बानो को अब स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट बना दिया गया है। सरकार ने इसे जनहित में लिया गया रूटीन ट्रांसफर बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस पर सवाल उठ रहे हैं।

विवाद की जड़: वीडियो में धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल विवाद की शुरुआत बुशरा बानो द्वारा साझा किए गए एक वीडियो से हुई, जिसमें उन्होंने UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित किया था। वीडियो के दौरान उन्होंने अस्सलाम-उल-अलैकुम , इंशाअल्लाह और जजाकल्लाह जैसे शब्दों का प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर हिंदू समूहों ने इस पर आपत्ति जताई कि उन्होंने वंदे मातरम या जय हिंद का इस्तेमाल नहीं किया।

अनुज चौधरी से तुलना क्यों? सोशल मीडिया पर इस मामले की तुलना यूपी के पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी से की जा रही है। समर्थकों का तर्क है कि अनुज चौधरी को अक्सर वर्दी में अपनी हिंदू मान्यताओं का सार्वजनिक प्रदर्शन करते देखा जाता है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक अधिकारी को धार्मिक अभिव्यक्ति की छूट है, तो दूसरे के साथ अलग व्यवहार क्यों? क्या व्यक्तिगत धार्मिक अभिव्यक्ति को देखने का नजरिया अलग है?

विपक्ष ने सरकार को घेरा कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधा। वहीं, TMC नेता कुणाल घोष ने भी अधिकारी के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने कोई असंवैधानिक बात नहीं कही है, तो केवल व्यक्तिगत मान्यताओं या आदतों के आधार पर उन्हें दंडित करना सही नहीं है।

कौन हैं बुशरा बानो? उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो एक मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से PhD की डिग्री हासिल की है। UPSC में सफलता पाने से पहले उन्होंने कुछ समय खाड़ी देशों में भी काम किया। 2021 में IPS में चयनित होने के बाद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

तबादले का समय और सवाल बुशरा बानो ने खड़गपुर ASP के रूप में कार्यभार संभाले अभी केवल ढाई महीने ही हुए थे। इतने कम समय में हुए तबादले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। हालांकि सरकार ने अपने आधिकारिक आदेश में किसी विशिष्ट कारण का उल्लेख नहीं किया है, लेकिन इस तबादले का समय धार्मिक समूहों द्वारा की गई शिकायतों से जुड़कर देखा जा रहा है।

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