पश्चिम बंगाल की सियासत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, जोड़ा फूल चुनाव चिह्न और पार्टी के मालिकाना हक को लेकर अपना बड़ा फैसला सुना सकता है। ममता बनर्जी और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के बीच चल रही यह कानूनी जंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
विवाद की शुरुआत और बगावत का दौर यह सियासी संकट अचानक नहीं पैदा हुआ। ममता बनर्जी द्वारा ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित करने के बाद से इसकी नींव पड़ी। जून 2026 में बागी गुट ने खुद को असली टीएमसी बताते हुए ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने का बड़ा ऐलान कर दिया था।
विधानसभा में ताकत का खेल इस लड़ाई ने तब गंभीर मोड़ लिया जब विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। ममता खेमे ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय का समर्थन किया था, लेकिन पार्टी के करीब 80 में से 58 विधायकों ने बागी गुट के पाले में जाकर ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया।
चुनाव आयोग पर फैसला लेने का दबाव मामला चुनाव आयोग तक जुलाई 2026 में पहुंचा। अब चुनाव आयोग पर फैसला लेने का दबाव इसलिए ज्यादा है क्योंकि 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों ने एक ही चुनाव चिह्न पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे उम्मीदवारों की वैधता पर संकट खड़ा हो गया है।
आयोग के सामने क्या विकल्प हैं? चुनाव आयोग के पास कई रास्ते हैं। वह बहुमत के आधार पर किसी एक गुट को असली टीएमसी मान सकता है, या विवाद सुलझने तक पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को नए चिह्न आवंटित किए जा सकते हैं। आयोग कोई अंतरिम व्यवस्था देकर उपचुनाव को सुचारू रूप से संपन्न कराने का विकल्प भी चुन सकता है।
क्या शिवसेना-NCP जैसा होगा हश्र? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग शिवसेना और एनसीपी विवाद की तरह टीएमसी मामले में भी संगठनात्मक ढांचे और विधायकों के बहुमत को आधार बना सकता है। फिलहाल, दिल्ली के गलियारों में हो रही सुनवाई बंगाल की आगामी राजनीति की दशा और दिशा तय करेगी।
15 साल के TMC शासन में जो काम अटके रहे, अब 15 हफ्तों में उन पर तेजी से काम हो रहा है!
— Oc updates (@ocjain4) September 16, 2026
जूनपुट, पश्चिम बंगाल में DRDO का नया हथियार और मिसाइल परीक्षण केंद्र—CM सुवेंदु अधिकारी ने परियोजना को मंजूरी दी।
एक सही वोट की ताकत देखिए—बंगाल में विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों को नई… pic.twitter.com/tRwZ7sPcwB
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