15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में यह आरोप लगे कि सरकार ने विदेशी कंपनियों के दबाव में यह कदम उठाया है। अब वित्त मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
विदेशी दबाव की खबरों पर सरकार का रुख वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह से भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि 2016 में शुरू हुआ UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है। अगस्त 2026 में 24.5 अरब ट्रांजेक्शन होने के बाद, इस विशाल नेटवर्क को साइबर खतरों से बचाने और तकनीकी रूप से अपग्रेड रखने के लिए फंड की आवश्यकता थी।
क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त चार्ज? सबसे अहम बात यह है कि ग्राहकों के लिए UPI पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा। किसी दोस्त को पैसे भेजने (P2P) या दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। MDR एक टैक्स नहीं है, बल्कि यह वह शुल्क है जो मर्चेंट्स (दुकानदारों) द्वारा बैंकों और पेमेंट ऐप्स को उनकी सेवाओं के लिए दिया जाएगा।
कैसे काम करेगा नया MDR स्ट्रक्चर?
छोटे कारोबारियों को मिलेगी सुरक्षा सरकार ने छोटे व्यापारियों को इस दायरे से बाहर रखा है। जो छोटे मर्चेंट UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक का कलेक्शन करते हैं, उन्हें कोई MDR नहीं देना होगा। इसके अलावा, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के छोटे कारोबारियों के लिए भी UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
निष्कर्ष वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लिया गया यह फैसला वापस नहीं होगा। इसका मुख्य उद्देश्य पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाना है, ताकि भविष्य में लाखों भारतीयों को निर्बाध डिजिटल लेनदेन की सुविधा मिलती रहे।
🔰 UPI Remains Free for Consumers
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) September 16, 2026
UPI continues to be free for customers. Sending money to friends, paying at shops, or scanning a QR code — all remain without charges.
Key Facts:
✅ No charges on P2P: Person-to-Person transfers are always free, regardless of amount.
✅ Small… pic.twitter.com/PyQ7hotNMN
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