नौकरीपेशा लोगों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की वेतन सीमा को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। यह मुद्दा पिछले 12 सालों से लंबित है।
क्या है नया प्रस्ताव? सरकार ईपीएफ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव को पहले ही वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। गौरतलब है कि आखिरी बार यह बदलाव साल 2014 में किया गया था।
किसे होगा सीधा फायदा? वर्तमान में, केवल 15,000 रुपये तक मूल वेतन (Basic Salary) पाने वाले कर्मचारियों का ही अनिवार्य रूप से ईपीएफ और पेंशन योजना (EPS) में योगदान होता है। नई सीमा लागू होने पर, 15,000 से 25,000 रुपये के बीच बेसिक वेतन पाने वाले लाखों कर्मचारी स्वतः ही इस सामाजिक सुरक्षा दायरे में आ जाएंगे।
क्या आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सीधा असर आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा। चूंकि पीएफ खाते में जाने वाला योगदान बढ़ जाएगा, इसलिए हाथ में आने वाली रकम कुछ कम हो सकती है। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से यह आपके रिटायरमेंट फंड को काफी मजबूत करेगा।
कंपनियों और सरकार पर असर यह कदम कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ योगदान देना होगा। वहीं, सरकार पर भी पेंशन सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ईपीएस के लिए पहले ही 11,144 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
किन कंपनियों पर होगा लागू? यह नियम मुख्य रूप से संगठित निजी क्षेत्र की उन कंपनियों पर लागू होगा जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां चाहें तो स्वेच्छा से इसे अपना सकती हैं। ध्यान रहे कि सरकारी कर्मचारी इस बदलाव के दायरे में नहीं आएंगे।
कब से लागू होगा नया नियम? माना जा रहा है कि कंपनियों को अपने पेरोल और सॉफ्टवेयर सिस्टम में बदलाव करने के लिए वक्त दिया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू कर सकती है। याद रखें, जब तक श्रम मंत्रालय की ओर से आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक आपकी सैलरी स्लिप में कोई बदलाव नहीं होगा।
फैसले के पीछे की वजह यह गति सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद बढ़ी है, जिसमें अदालत ने ईपीएफओ को महंगाई और न्यूनतम मजदूरी के आधार पर वेतन सीमा की समीक्षा करने को कहा था। शुरुआती चर्चाओं में इसे 30,000 रुपये करने का सुझाव था, लेकिन आम सहमति अब 25,000 रुपये पर बनी है।
नया रोजगार, नई जिम्मेदारी और प्रोत्साहन का अवसर!
— EPFO (@officialepfo) September 16, 2026
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत पात्र अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर नियोक्ताओं को प्रति माह ₹3,000 तक का प्रोत्साहन मिल सकता है।#PradhanMantriViksitBharatRozgarYojana #EPFO #EPFOWithYou #HumHainNa pic.twitter.com/wUnNA2bLlc
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