लद्दाख के जंस्कार में सांस्कृतिक महाकुंभ: फेस्टिवल का आगाज, युवाओं को मिला डिजिटल मंत्र
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ज़ंस्कार में नई ऊर्जा का संचार लद्दाख की खूबसूरत वादियों में 11वें लद्दाख ज़ंस्कार फेस्टिवल 2026 का शानदार आगाज़ हो गया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस दो दिवसीय उत्सव का उद्घाटन किया। यह आयोजन ज़ंस्कार के समृद्ध इतिहास, अनूठी संस्कृति और पर्यटन की असीम क्षमताओं का प्रतीक है।

ज़िले का दर्जा मिलने के बाद पहला उत्सव इस साल अप्रैल में ज़ंस्कार को आधिकारिक रूप से ज़िले का दर्जा मिलने के बाद यह पहला बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। उपराज्यपाल ने स्थानीय उत्पादों और शिल्प की दोक्सा प्रदर्शनियों का जायजा लिया। साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में पूरी की गई विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन करके विकास की गति को और तेज़ कर दिया।

सांस्कृतिक धरोहर को मिला सम्मान कार्यक्रम के दौरान, उपराज्यपाल ने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज ज़ंस्कार की वार्षिक पत्रिका शेसराब का विमोचन किया। इसके अलावा, इंडिया पोस्ट के सहयोग से गोनबो रंगजोन पर एक विशेष पोस्टल कवर भी जारी किया गया। उपराज्यपाल ने कहा कि ज़िले का दर्जा मिलना सिर्फ प्रशासन का बदलाव नहीं, बल्कि यहाँ के लोगों की पहचान को मिली बड़ी मान्यता है।

पर्यटन मानचित्र पर जंस्कार की नई पहचान उपराज्यपाल ने घोषणा की कि ज़ंस्कार फेस्टिवल को अब लद्दाख प्रशासन के आधिकारिक पर्यटन कैलेंडर का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस साल 31 अगस्त तक 4.05 लाख से अधिक पर्यटकों ने लद्दाख का दौरा किया है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था, होमस्टे और छोटे उद्यमियों को सीधे लाभ मिल रहा है।

युवाओं को डिजिटल होने की सीख अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने युवाओं को भविष्य के लिए खास मंत्र दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे रखें, लेकिन साथ ही आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करें। उन्होंने युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए ज़ंस्कार की सुंदरता को दुनिया तक पहुंचाने और उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

टिकाऊ पर्यटन पर ज़ोर अंत में, उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि पर्यटन का विकास टिकाऊ और जिम्मेदार होना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें विकास के साथ-साथ ज़ंस्कार के नाज़ुक पर्यावरण और स्थानीय परंपराओं का पूरा सम्मान करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर का आनंद ले सकें।

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