हिम्मत है तो संसद में लाएं UCC , उमर अब्दुल्ला ने केंद्र को दी सीधी चुनौती
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास पर्याप्त संख्या बल है, तो वे इसे राज्यों के जरिए थोपने के बजाय सीधे संसद में लाएं।

राज्यों में थोपने के बजाय संसद में करें बहस उमर अब्दुल्ला ने कहा कि UCC जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मामले राज्य विधानसभाओं के नहीं, बल्कि संसद के विषय हैं। उन्होंने निंदा करते हुए कहा कि सरकार चोर दरवाजे से इसे लागू करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक यह पूरे देश में लागू नहीं होता, तब तक इसे सार्वभौमिक नहीं कहा जा सकता।

सहयोगियों की सहमति पर उठाए सवाल उमर ने NDA गठबंधन के भीतर की दरार को भी उजागर किया। उन्होंने जदयू (JDU) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सरकार के अपने सहयोगी ही बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं हैं, तो वे पूरे देश में इसे लागू करने का दावा कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि सरकार को पहले यह देखना चाहिए कि क्या उनके पास संसद में इसे पास कराने के लिए बहुमत है।

एक देश, एक चुनाव का दोहराया पैटर्न मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक देश, एक चुनाव और अन्य आरक्षण संबंधी प्रस्तावों की तरह UCC को भी संसद से बाहर ही रखा गया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पैटर्न को बदलने की जरूरत है, कानून को संसद के पटल पर रखें और देखें कि क्या वह बहुमत के साथ पारित हो पाता है।

LAC और विदेश नीति पर दो टूक चीन के साथ LAC पर तनाव कम करने की पहल का स्वागत करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सीमावर्ती नागरिकों के लिए कम सैन्य तैनाती एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि LOC पर भी ऐसी ही प्रगति देखने को मिलेगी।

विदेश नीति के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपनी नीतियों के लिए किसी विदेशी प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें न तो किसी की तारीफ चाहिए और न ही किसी के विरोध से डरना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स (BRICS) में पहलगाम हमले का जिक्र होने को भारत की कूटनीतिक जीत बताया और कहा कि सरकार को अपनी विदेश नीति पर स्वतंत्र रूप से ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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