सऊदी अरब पर हूतियों का बड़ा हमला: मिसाइल और ड्रोन से दहले कई शहर, इमरजेंसी अलर्ट जारी
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यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों पर एक बार फिर घातक हमला किया है। मिसाइलों और ड्रोनों से लैस इस हमले ने जेद्दा, जाजान, आभा और खमीस मुशैत जैसे प्रमुख शहरों को हिलाकर रख दिया है। इन हमलों के बाद सऊदी प्रशासन ने कई इलाकों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है।

13 नागरिक घायल, तबाही का मंजर

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 13 नागरिक घायल हुए हैं। विस्फोटों के कारण सात घरों और दो वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने खमीस मुशैत स्थित एक सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया था। हमले की तीव्रता को देखते हुए सिविल डिफेंस ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी थी, हालांकि कुछ घंटों बाद खतरे को देखते हुए अलर्ट वापस ले लिया गया।

चीन निर्मित मिसाइलों की एंट्री

इस हमले में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई में पहली बार चीनी मूल की DF-15 बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। अब तक सार्वजनिक तौर पर केवल DF-3 और DF-21 मिसाइलों के उपयोग की जानकारी थी, लेकिन DF-15 का सामने आना इस संघर्ष के नए और घातक चरण में प्रवेश करने का संकेत है।

लाल सागर पर हूतियों का बढ़ता शिकंजा

हूती विद्रोहियों ने यमन के रणनीतिक मोचा बंदरगाह और मयून द्वीप पर अपना नियंत्रण घोषित कर दिया है। यह इलाका बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इन क्षेत्रों पर कब्जे के बाद लाल सागर में जहाजों की आवाजाही कम हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।

अमेरिका की सतर्क चुप्पी

सऊदी अरब ने इस संकट से निपटने के लिए अमेरिका से सैन्य मदद मांगी है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे युद्ध में कूदने से इनकार कर दिया है। अमेरिका फिलहाल सऊदी को केवल खुफिया जानकारी और लक्ष्य निर्धारित करने में तकनीकी मदद दे रहा है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की है।

भारत पर बढ़ेगा ऊर्जा का संकट?

यमन में 2022 के बाद से संघर्ष अब एक बार फिर पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है। यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो लाल सागर के जरिए होने वाली तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है। तेल के तीन प्रमुख समुद्री रास्तों के प्रभावित होने की आशंकाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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