अशांत दुनिया में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: कैसे सफल रहा BRICS Summit 2026?
News Image

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 की सफलता ने वैश्विक पटल पर भारत की धमक को साबित कर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस सम्मेलन को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताते हुए इसके पीछे की चुनौतियों और सफलताओं की कहानी बयां की है।

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का कड़ा संदेश विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और एकजुट रुख अपनाया है। सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism) समेत आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह के दोहरे मापदंड (Double Standards) को स्वीकार नहीं किया गया है, जो कि इस सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण नतीजा है।

बंटवारे के दौर में भारत ने जोड़े हाथ ऐसे समय में जब दुनिया दो बड़े संघर्षों और गंभीर भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, भारत ने 32 प्रतिनिधिमंडलों को एक मंच पर लाकर अपनी कन्वीनिंग पावर का लोहा मनवाया। इसमें 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश और 11 अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल रहे। भारत की इस पहल ने साबित कर दिया कि वह परस्पर विरोधी विचारधारा वाले देशों को भी संवाद की मेज पर ला सकता है।

पश्चिम एशिया संकट पर आम सहमति सम्मेलन के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दा पश्चिम एशिया (मध्य-पूर्व) का संघर्ष था। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत के प्रयासों से सभी सदस्य देश एक साझा बयान पर सहमत हुए। इसमें नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, स्थिरता और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

पीएम मोदी के सिद्धांतों की गूंज डॉ. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स समिट की सफलता प्रधानमंत्री मोदी के संवाद, कूटनीति और विकास (Dialogue, Diplomacy and Development) के मंत्र का परिणाम है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि दुनिया भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ और वैश्विक नेता के रूप में देख रही है।

आलोचकों को करारा जवाब सम्मेलन से पहले कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि क्या भारत इतने जटिल माहौल में ब्रिक्स का आयोजन कर पाएगा। इन आशंकाओं को खारिज करते हुए विदेश मंत्री ने गर्व के साथ कहा, कई लोगों ने कहा था कि यह नहीं होगा, लेकिन यह हुआ। नई दिल्ली में हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ।

यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं रहा, बल्कि इसने यह सिद्ध किया कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारत बातचीत के जरिए कूटनीतिक रास्ता निकालने में सक्षम है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सरेआम बेइज्जती के बाद भी मोहसिन नकवी की तारीफ में जुटे पाकिस्तानी फैंस, वायरल वीडियो देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे

Story 1

गाजा पर बनी फिल्म नाजा से इजरायल में सियासी भूचाल, निर्माताओं की नागरिकता रद्द करने की धमकी

Story 1

अब PF की जानकारी मिलेगी बस एक Hello पर: WhatsApp से हुआ काम आसान

Story 1

पाकिस्तान की नई नौटंकी: मसूद अजहर पर इनाम का ड्रामा या FATF से बचने की चाल?

Story 1

BRICS पर मचा सियासी घमासान: कांग्रेस के रुख पर JDU का तीखा प्रहार, बोले- यह देश का गौरव है

Story 1

अब पीएफ की जानकारी उंगलियों पर: EPFO लाया अपना व्हाट्सएप चैनल, बस एक Hello से मिलेगा हर अपडेट

Story 1

मनोकामना पूरी न होने पर पुजारी बना बंधक: फिरौती मांगना पड़ा भारी, पुलिस ने ऐसे दबोचे आरोपी

Story 1

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: जयपुर में BJP का दबदबा, अजमेर में निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी

Story 1

बॉलीवुड में गणेश चतुर्थी की रौनक: सैफ के हाथों बनी बप्पा की मूर्ति से लेकर सितारों के घर तक छाई खुशियां

Story 1

बंदर जैसी फुर्ती! पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर सेकंडों में चढ़ गई लड़की, वीडियो देख दंग रह गए लोग