जेडीयू में वो दो वन डमरू कौन हैं? प्रशांत किशोर के हमले से बिहार की सियासत में खलबली
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बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर (PK) के बयानों ने एक बार फिर पारा चढ़ा दिया है। इस बार उन्होंने सत्ताधारी पार्टी जेडीयू के नाम बदलने की चर्चाओं पर निशाना साधते हुए पार्टी के शीर्ष नेताओं को वन डमरू कहकर संबोधित किया है।

जेडीयू पर अमित शाह का रिमोट कंट्रोल?

प्रशांत किशोर ने जेडीयू के नाम को जनता दल यूनाइटेड से बदलकर जनता दल (नीतीश) करने की अटकलों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी। पीके के अनुसार, आज जेडीयू का संचालन नीतीश कुमार नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। भाजपा जो तय करती है, जेडीयू में वही होता है।

आखिर कौन हैं ये वन डमरू ?

अपने बयान में पीके ने कहा, नीचे दो वन डमरू लोग बैठे हैं, अमित शाह जैसा चाहेंगे, वैसे ही चलेगा। हालांकि, प्रशांत किशोर ने इन दो नेताओं का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनका इशारा साफ था। विशेषज्ञों का मानना है कि पीके ने जेडीयू के उन वरिष्ठ नीति-निर्माताओं पर निशाना साधा है, जो कथित तौर पर दिल्ली के इशारों पर नाचते हैं और पार्टी के स्वतंत्र निर्णयों को खत्म कर चुके हैं।

निशाने पर क्यों है नीतीश का ब्रांड ?

प्रशांत किशोर की रणनीति अब बदल गई है। पहले जहां उनका मुख्य निशाना सम्राट चौधरी हुआ करते थे, वहीं अब वे सीधे नीतीश कुमार के प्रशासनिक ढांचे और जेडीयू की विश्वसनीयता पर हमला कर रहे हैं। पीके का मकसद साफ है— ब्रांड नीतीश के अवसान का नैरेटिव गढ़ना और यह जताना कि जेडीयू अब ढलान पर है।

क्या है पीके की मास्टर पॉलिटिक्स?

प्रशांत किशोर बिहार के उस तटस्थ और अति-पिछड़ा वोट बैंक को साधना चाहते हैं जो वर्षों से नीतीश कुमार के साथ रहा है। जेडीयू को कमजोर दिखाकर वे जन सुराज को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। वे जाति और धर्म की राजनीति से हटकर शिक्षा और रोजगार का नया नैरेटिव सेट कर रहे हैं।

क्या वाकई जेडीयू के पास कोई विकल्प नहीं?

प्रशांत किशोर बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधन प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी जेडीयू को घेर रहे हैं, क्योंकि यह विभाग लंबे समय से जेडीयू के पास ही रहा है। पीके की यह सोची-समझी रणनीति है कि जनता के मन में यह संदेश जाए कि जेडीयू अब केवल एक रिमोट-कंट्रोल्ड पार्टी बनकर रह गई है।

आने वाले विधानसभा चुनावों में यह वन डमरू वाला नैरेटिव कितना असरदार साबित होगा, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि पीके ने जेडीयू के अंदरखाने बेचैनी जरूर पैदा कर दी है।

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