जोधपुर के छोटे से गांव से सीधे कमेंट्री बॉक्स तक: सुनील गावस्कर के साथ गूंजेगी देवेंद्र की आवाज
News Image

जोधपुर के देवेंद्र कुमार के लिए यह एक सपने जैसा सफर है। भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली आगामी टी20 सीरीज में वह न केवल कमेंट्री करेंगे, बल्कि दिग्गज सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों के साथ साझा मंच साझा करते नजर आएंगे। राजस्थान के छतरपुरा गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है।

टोनी ग्रेग की आवाज से मिली प्रेरणा

देवेंद्र का सपना बचपन में ही तब शुरू हुआ, जब उन्होंने महान कमेंटेटर टोनी ग्रेग को सुना। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेजी भाषा थी। हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़े होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रेडियो और अंग्रेजी अखबारों के जरिए उन्होंने खुद को तैयार किया और कमेंट्री की बारीकियों को सीखा।

नर्सिंग की नौकरी छोड़ी, जुनून को चुना

कमेंट्री की दुनिया में आने से पहले देवेंद्र ने नर्सिंग की पढ़ाई की और इस क्षेत्र में काम भी किया। उन्हें विदेश में नौकरी का अवसर भी मिला, लेकिन उनका मन हमेशा क्रिकेट के मैदान और कमेंट्री बॉक्स में ही अटका था। उन्होंने स्थिर करियर को छोड़कर अपने उस पुराने सपने को पूरा करने का फैसला किया, जिसे उन्होंने बचपन में देखा था।

अफगानिस्तान बोर्ड के साथ मिली पहचान

2017 में उन्हें पहला बड़ा मौका मिला, जब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें अफगानिस्तान और आयरलैंड सीरीज के लिए चुना। धीरे-धीरे उन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट की आवाज के रूप में अपनी पहचान बना ली। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) के पैनल में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।

गावस्कर के साथ मंच साझा करना एक बड़ी उपलब्धि

भारत और अफगानिस्तान टी20 सीरीज देवेंद्र के करियर का एक मील का पत्थर है। जिस सुनील गावस्कर और संजय मांजरेकर जैसे दिग्गजों को सुनकर उन्होंने अपनी कमेंट्री को संवारा, आज वे उन्हीं के साथ कमेंट्री बॉक्स में होंगे। यह सीरीज उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि अफगान बोर्ड के पैनल में रहते हुए वह अपनी मातृभूमि की टीम को खेलते हुए देखेंगे।

बीसीसीआई से लेकर बीबीसी तक का सफर

देवेंद्र की सफलता केवल अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने बीसीसीआई के प्रोडक्शन में दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। इसके अलावा, उन्होंने बीबीसी के लिए भी काम किया है।

एक मिसाल जो बदल रही है सोच

छतरपुरा जैसे छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाना यह साबित करता है कि किसी भी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए केवल महंगे स्कूल या बड़े शहर की जरूरत नहीं होती। एक अटूट सपना, सही दिशा में की गई मेहनत और कभी न हार मानने वाली जिद ही कामयाबी का असली रास्ता है। देवेंद्र कुमार की यह कहानी आने वाले समय में कई युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

विनोद साहनी हत्याकांड: गोंडा जा रहे यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय हिरासत में, सियासी माहौल गरमाया

Story 1

वायरल: iPhone 17 Pro बना 18 Pro! भारतीयों के देसी जुगाड़ ने एप्पल की बढ़ाई टेंशन

Story 1

कोलकाता मेट्रो बना अखाड़ा: RPF जवान से सरेआम भिड़ीं महिलाएं, वीडियो देख दंग रह गए लोग

Story 1

चलती कार बनी आग का गोला: मुरादाबाद में दहला कांठ रोड, बाल-बाल बचे अधिवक्ता

Story 1

मोदी-शी जिनपिंग की ऐतिहासिक बैठक: सीमा विवाद से व्यापार तक, क्या निकला समाधान?

Story 1

सीतामढ़ी में खूनी सवेरा: मॉर्निंग वॉक पर निकले जिला परिषद सदस्य के पति की ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या

Story 1

IND vs AFG: भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज का बिगुल, जानें कब, कहां और कैसे देखें लाइव एक्शन

Story 1

महिला एशिया कप फाइनल: क्या श्रीलंका से बदला ले पाएगी टीम इंडिया? 10वीं बार हुंकार भरने को तैयार

Story 1

जंक फूड छुड़ाने के लिए बच्चों को दिखाया नकली पेट के कीड़े , रोते बच्चों का वीडियो देख भड़के लोग

Story 1

BRICS दिल्ली डिक्लेरेशन: 18वें शिखर सम्मेलन में बनी सर्वसम्मति, बदलती दुनिया के लिए क्या है नया रोडमैप?