मोदी-शी जिनपिंग की ऐतिहासिक बैठक: सीमा विवाद से व्यापार तक, क्या निकला समाधान?
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह मुलाकात न केवल संबंधों को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण रही, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

बैठक का मुख्य आधार: 3 परस्पर नियम प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के साथ संबंधों को नई दिशा देने के लिए 3 परस्पर (3 Mutuals) का मंत्र दिया है:

सीमा विवाद पर बनी सहमति वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सीमा पर शांति का रहा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति ही द्विपक्षीय संबंधों के विकास की नींव है। दोनों पक्ष अब पुराने समझौतों का पालन करने और विवादों के निष्पक्ष व परस्पर स्वीकार्य समाधान पर सहमत हुए हैं।

व्यापारिक असंतुलन और आर्थिक सुधार दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य फोकस व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) को कम करने और सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने पर रहा। दोनों देश चाहते हैं कि बाजारों तक एक-दूसरे की पहुंच अधिक पारदर्शी और आसान हो, ताकि आर्थिक सहयोग का लाभ दोनों देशों की जनता को मिल सके।

वैश्विक मंच पर साझा जिम्मेदारी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश होने के नाते, भारत और चीन पर मानवता के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा और एक बहुध्रुवीय (Multipolor) विश्व के निर्माण पर जोर दिया। उनका मानना है कि चीन और भारत को एक-दूसरे की ताकत से सीखकर साझा विकास की राह तलाशनी चाहिए।

जन-आवाजाही और सांस्कृतिक संपर्क बैठक में केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच आपसी जुड़ाव पर भी जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने, व्यापारिक आवाजाही को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने की आवश्यकता जताई ताकि दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंधों में सुधार हो सके।

भारत की तकनीक का दिखा दम शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने भारत मंडपम में भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी का भी दौरा किया। यहां भारत की अत्याधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता की झलक देखकर वैश्विक नेताओं ने भारत के तकनीकी विकास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह प्रदर्शनी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती साख का प्रतीक बनी।

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